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विक्रम केम: हादसे में पैर गंवाया पर हौसला नहीं

Wed, 16 Jan 2019 08:54 PM IST
अंशुल तलमले जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: अंशुल तलमले Updated Wed, 16 Jan 2019 08:54 PM IST
सार

 National Power Lifting Bench Press Champion Vikram Kem Aims For World Championship In Slowakia

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National Power Lifting Bench Press Champion Vikram Kem is inspiration for many

विस्तार

मन में अगर कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो कोई भी बाधा राह नहीं रोक सकती। दिल्ली के खानपुर निवासी विक्रम केम ने भी तमाम विषम परिस्थितियों से उबरकर अपनी नई पहचान बनाई। बचपन से खेल में नाम कमाने की विक्रम की हसरत छह जनवरी को राष्ट्रीय चैंपियन बनकर पूरी हुई।

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सोनीपत में हुई नेशनल पावरलिफ्टिंग बैंच प्रेस के 90 किलोग्राम वर्ग में विक्रम ने 85 किलो वजन उठाकर नेशनल चैंपियन बनकर अपने सपने को पूरा करने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। हालांकि इस दिव्यांग पावरलिफ्टर का लक्ष्य स्लोवाकिया में अक्तूबर में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने की है।

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14 साल पहले दुर्घटना में गंवा दिया था पैर

विक्रम ने 14 साल पहले एक सड़क हादसे में अपना पैर गंवा दिया था। तब बीए प्रथम वर्ष के छात्र विक्रम 28 मई 2005 को बाइक से जिम में जा रहे थे। चिराग दिल्ली चौराहे पर तेज रफ्तार से आ रहे ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में उनका एक पैर खराब हो गया। दो साल बिस्तर रहे।

डॉक्टर्स ने सत्तर फीसदी दिव्यांगता का सर्टिफिकेट देकर घर भेज दिया। उन्हें लगा कि जिंदगी खत्म हो गई, पर उन्होंने हार नहीं मानी। कड़ी मेहनत से उन्होंने फिर जिम में अभ्यास शुरू किया और अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ा दिए।

मां के साथ ही अंकल अरुण गर्ग ने भी विक्रम का हौसला बढ़ाया। इस बीच 2016 में विक्रम की सौम्या से शादी हुई। सौम्य एक पांव से पोलियाग्रस्त हैं। इनका एक बच्चा भी है। पत्नी ने कभी यह अहसास नहीं होने दिया कि हम दिव्यांग हैं।

राजीव गांधी अवार्डी कोच जुगल धवन ने विक्रम के सपने को साकार करने में मदद की। विक्रम हर बुधवार और शनिवार को बस से सोनीपत कोचिंग के लिए जाते हैं। 

नौकरी के लिए खा रहे हैं धक्के

विक्रम को अफसोस है कि तमाम कोशिशों के बाद भी उसे सरकारी नौकरी मिली। इतना ही नहीं प्राइवेट क्षेत्र में किसी ने कोई मदद की। रेलवे और बैंक में कई बार प्रयास किए मगर सफलता नहीं मिली।

जिम में ट्रेनर की नौकरी मांगने पर भी किसी ने काबिल नहीं समझा। आर्थिक परेशानी के बावजूद विक्रम के इरादे बुलंद हैं। वह कहते हैं खाना एक समय मिला तो भी ठीक।अब पीछे नहीं हटूंगा।मेरा लक्ष्य है कि डेढ़ सौ किलो या उससे ऊपर तक की बैंच प्रेस मारना। मेरा लक्ष्य देश के लिए विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतना है और इसे मैं हासिल करके ही रहूंगा।
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