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चोट लगने के डर से मोहम्मद अली नहीं चाहते थे उनकी बेटी लैला भी बॉक्सर बनें

Mon, 22 Oct 2018 08:35 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 22 Oct 2018 08:35 AM IST
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Muhammad Ali did not wanted her daughter Laila ali to be Boxer due to fear of injury
मोहम्मद अली और लैला अली
पूर्व हैवीवेट चैंपियन मोहम्मद अली चाहते थे कि उनके बच्चे कोई ऐसा काम करें जहां शारीरिक रूप से चोट लगने का खतरा न हो, उनकी तरह मुक्केबाज न बने। जब बेटी लैला अली ने ग्लव्स उठाने का फैसला किया तो उन्होंने लैला को पुनर्विचार करने को कहा पर जब उन्हें लगा कि बेटी खेल को लेकर गंभीर है तो फिर उसे पूरा समर्थन किया और उस पर फख्र भी किया। यह कहना है कि मोहम्मद अली की बेटी और लैला की छोटी बहन हना का।
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हना कहती हैं कि डैेड के ढेरों दिए तोहफों में सबसे बड़ा तोहफा यह है कि वह अपने बच्चों का समर्थन और प्रोत्साहन करते थे। बेशक वो उनकी बात से सहमत हों या नहीं हों। बस वो यह दुआ करते थे कि लैला को कभी रिंग में गंभीर चोट न लगे और यह उनकी दुआओं का असर है कि लैला ने रिंग को अजेय रहकर अलविदा कहा और वो कभी चोटिल नहीं हुई। हना ने कहा कि डैड अपने बच्चों पर बहुत ज्यादा अंकुश या डांट-डपट नहीं करते थे बल्कि सरपस्त की भूमिका में हमेशा उनकी चिंता करते थे। 
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हना ने अपने पिता की यादों को एक पुस्तक के जरिए जिल्दबंद किया है ‘ऐट होम विद मोहम्मद अली’।
दरअसल यह किताब एक कैनवास है जिस पर एक सेलेब्रेटी पिता की अनसुनी दास्तां की तस्वीर है। रिंग का बादशाह घर पर किसी आम पिता की तरह बच्चों को लेकर बेहद जज्बाती और फिक्रमंद था। ये किताब केवल अली के अनगिनत प्रशंसकों के लिए ही नहीं बल्कि उन तमाम माता-पिताओं के लिए भी है जो चाहते हैं कि वो बेहतर अभिभावक बने, उन बच्चों के लिए जो यह सीखें भाई-बहन के साथ कैसे प्यार बांटकर और एक-दूसरे का हमदर्द होकर जिया जाता है।  
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यूं आया किताब लिखने का आइडिया 
हना कहती हैं कि जब मुझे पापा की कुछ रिकॉर्डिंग मिली और उनके कुछ वो पत्र मिले जो उन्होंने मेरी मां को लिखे थे तो मेरे जेहन में एक किताब लिखने का आइडिया उपजा। इस किताब में कुछ परिवार की कुछ ऐसी तस्वीरें हैं जो अब तक किसी ने नहीं देखीं। जब अली ने वो रिकॉर्डिंग की थी तो वह इसको लेकर सुनिश्चित नहीं थे कि इसका इस्तेमाल कब और कैसे होगा लेकिन वह जानते थे कि कभी न कभी ये उनके परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाएंगी। उन निजी चीजों से पता चलता है कि शुरुआत में अपनी व्यस्तताओं और बाद में गिरते स्वास्थ्य की जटिलताओं के बावजूद अपने परिवार से कितना घुले-मिले थे अली। वो चाहते थे कि उनकी नौ संतानें आपस में मिल-जुल कर एक परिवार की तरह रहें। 

हना को खुद भेंट की थी आडियो रिकॉर्डिंग
मोहम्मद अली ने 1970 के दशक में लास एंजिलिस स्थित अपने घर में आवाज की रिकॉर्डिंग करने का सिलसिला शुरू किया। हना कहती हैं कि उन्होंने बाद में यह आडियो रिकॉर्डिंग मुझे यह कहकर दे दीं कि यदि वो चाहे तो इसे बेचकर कुछ पैसा भी बना सकती है लेकिन मैंने कहा, नहीं डैड मैं इसको लेकर किताब लिखूंगी। वो इसको बहुत खुश हुए थे। हना ने रिकार्डिंग के अधिकार (राइट्स) नहीं बेचे लेकिन एक डाक्यूमेंटरी ‘आई एम अली’ के लिए लाइसेंस दे दिया। बकौल हना यह रिकॉर्डिंग दुनिया का पहला रियलिटी शो है। यह एक शानदार आइडिया था। डैड हमेशा समय से आगे चलते थे। वो जानते थे कि समय कितना तेजी से आगे बढ़ रहा है। बहुत सी चीजें भुला दी जाएंगी लेकिन जितना मुमकिन हो सके बचाकर रखो। हना का कहना है कि उनकी टेप को लेकर कोई फिल्म बनाने की योजना नहीं है। अलबत्ता उनके पास इतनी रिकार्डिंग है कि वो चाहे तो कई डाक्यूमेंटरी और मिनी सीरीज बन सकती है। 


बेटी की लिखी किताब नहीं देख पाए 
हना ने अली के निधन से लगभग एक महीने पहले किताब बेची थी लेकिन जब तक वह छपकर आती तब तक यह दिग्गज मुक्केबाज नहीं रहा लेकिन वह किताब लिखे जाने को लेकर बहुत खुश थे और उन्हें अपनी बेटी पर बड़ा नाज था। वह कहती हैं कि लिखना मेरा पेशा नहीं, मेरा शौक है।  90 आडियो टेप हैं हना के पास पिता मोहम्मद अली की जिसमें 70-80 घंटे की रिकॉर्डिंग है
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