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गुरू और शिष्या दोनों को एक साथ मिला अवार्ड, खुशी से झूम उठी मीराबाई

Tue, 25 Sep 2018 08:12 PM IST
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 25 Sep 2018 08:12 PM IST
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Mirabai Chanu Receive Khel Ratna Awards, and her coach vijay sharma also achieve Dronacharya
mirabai chanu

देश का सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड हासिल करना किसी भी खिलाड़ी का सपना हो सकता है, लेकिन वर्ल्ड चैंपियन वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने प्रतिष्ठित अर्जुन अवार्ड पाने का सपना देखा था। मीरा खुलासा करती हैं कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह खेल रत्न बनेंगी।

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वह तो सिर्फ और सिर्फ अर्जुन अवार्डी बनने का सपना देखती थीं। उन्हें उम्मीद भी थी कि एक न दिन उनके खाते में यह अवार्ड जरूर आएगा, लेकिन राजीव गांधी खेल रत्न मिलने पर वह अचंभित हैं। मीरा को खुशी इस बात की है कि उनके गुरु विजय शर्मा को द्रोणाचार्य और उन्हें खेल रत्न एक साथ मिला है।
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खुद के लिए खरीदी साइकिल घर में ठहराए गरीब बच्चे
मीरा के मुताबिक उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद केंद्र और राज्य सरकार से जो भी कैश अवार्ड मिला उससे उन्होंने इंफाल में चार कमरों का एक घर खरीदा। उनके माता पिता और भाई अभी भी गांव में ही रहते हैं, लेकिन उन्होंने इस घर में गांव और पड़ोसी गांव के गरीब बच्चों को ठहराया है।
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मीरा के मुताबिक उन्हें इंफाल में ट्रेनिंग के लिए गांव से दर दर की ठोकरें खाकर आना पड़ता था। उन्हें इंफाल में ठहरने की जगह नहीं मिलती थी क्यों कि पैसे इतने नहीं होते थे। उन्हें मालूम है कि गांव से आने वाले बच्चों को इंफाल में किस तरह की कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से उन्होंने इंफाल में ट्रेनिंग करने वाले कुछ गरीब बच्चों को अपने नए घर में ठहराया है।

Mirabai Chanu Receive Khel Ratna Awards, and her coach vijay sharma also achieve Dronacharya
मीराबाई चानू - फोटो : file pic

यही नहीं साई ने उनकी ट्रेनिंग के लिए गांव में जो प्लेटफार्म और वेटलिफ्टिंग सेट मुहैया कराया है उसे भी उन्होंने गांव के  प्रतिभाशाली बच्चों के लरए खोल रखा है। वह पटियाला में एक स्कूटी खरीदना चाहती थीं लेकिन कोच ने मना कर दिया कि इसकी जरूरत नहीं है। एक साइकिल ले लो। उन्होंने यही किया। वह साइकिल से एनआईएस में इधर उधर जाती हैं।

मीरा मानती हैं कि खेल रत्न मिलने पर उनकी अब ओलंपिक पदक के लिए जिम्मेदारी और बढ़ गई है। वह अगले वर्ष अप्रैल में एशियाई चैंपियनशिप से वापसी करेंगी। फिल्हाल वह अक्तूबर माह तक मुंबई में ही हीथ मैथ्यूज के पास रहकर इलांज और ट्रेनिंग एक साथ करेंगी।

मणिपुर से पहली बार बाहर निकली मां
मीरा अवार्ड के लिए अपनी मां को साथ लेकर आई है। वह बताती हैं कि उनकी मां पहली बार मणिपुर से बाहर निकली हैं। उन्होंने मणिपुर के अलावा कुछ नहीं देखा है। उन्होंने पहली बार इतना बड़ा होटल देखा है। हालांकि उन्होंने भी कभी इंडिया गेट नहीं देखा है। अब वह मां को लेकर इंडिया गेट जाएंगी। राष्ट्रपति भवन में अवार्ड कार्यक्रम के लिए मीरा को साड़ी बांधनी थी। उन्हें साड़ी पहनना अच्छा लगता है, लेकिन इसे बांधना नहीं आता है। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में कोच हंसा शर्मा ने उनकी साड़ी बांधी। यहां उनकी साड़ी बांधना के इंतजाम साई ने कराया है।

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