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पाकिस्तान में शोक: मिल्खा सिंह के निधन से दुखी है उनके प्रतिद्वंदी का बेटा, कहा- हमारे परिवार के लिए व्यक्तिगत क्षति

Sun, 20 Jun 2021 09:08 PM IST
ओम. प्रकाश स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ओम. प्रकाश Updated Sun, 20 Jun 2021 09:08 PM IST
सार

मिल्खा सिंह के निधन के बाद पाकिस्तान में भी शोक की लहर है। पाकिस्तान के पूर्व एथलीट अब्दुल खालिक के बेटे के मुताबिक मिल्खा सर का चले जाने मेरे परिवार के लिए व्यक्तिगत क्षति है। 

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Milkha Singh rival Abdul Khaliq son said His passing a loss to our family in Pakistan
मिल्खा सिंह - फोटो : social media

विस्तार

मिल्खा सिंह के निधन के बाद दुनिया ने एक बेहतरीन एथलीट खोल दिया। महान खिलाड़ी अपने देश के लिए परिवार के गहनों की तरह होते हैं। हमारे राष्ट्र के साथ इतिहास को  देखते हुए मिल्खा सिंह का चले जाना यह भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए नुकसान है। यह कहना है मिल्खा सिंह के प्रतिद्वंदी रहे पाकिस्तान के एथलीट अब्दुल खालिक के बेटे का। उनका कहना है कि ट्रैक पर मेरे पिता और मिल्खा सिंह में बहुत कुछ समान था। इसलिेए उनका निधन पाकिस्तान में मेरे परिवार के लिए व्यक्तिगत क्षति है। 

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अब्दुल खालिक के बेटे ने कहा कि रावलपिंडी में मेरे पिता जी गरीबी से जूझते हुए मिल्खा सर की तरह विश्व स्तर के एथलीट बने। मेरे पिता भी सेना में शामिल हुए और ये आर्मी का ही प्रशिक्षण था कि जहां उन्हें दौड़ने का जुनून सवार हुआ। इसके बाद वह साल 1956 से लेकर 1960 तक एशिया के सबसे तेज दौड़ने वाले एथलीट रहे।  

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खालिक के बेटे के मुताबिक मेर पिता और मिल्खा सर की कहानी आपसे में बहुत मिलती है। उन्होंने कहा कि 1956 में मेलबर्न ओलंपिक खेलों के दौरान मेरे पिता को निराशा हुई वह 100 और 200 मीटर रेस में चौथे नंबर पर रहे। वहीं 1960 में रोम ओलंपिक के दौरान 400 मीटर दौड़ में मिल्खा जी भी चौथे स्थान पर रहे थे। 

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उन्होंने आगे कहा कि मैंने पहली बार मिल्खा जी से साल 2009 में बात की। उनके सचिव ने उनकी बायोपिक भाग मिल्खा भाग में मुझसे मेरे पिता के चित्रण के अधिकारों के बारे में बात की। खालिक के बेटे ने कहा कि वह जल्दी ही लाइन पर आ गए और जब मैंने कहा कि आप महान एथलीट हैं, तो उन्होंने उसके बाद जो कुछ कहा वह मुझे आज भी याद है। मिल्खा सर ने मुझसे कहा था कि बेटा तुम्हारे पिता एक महान एथलीट थे। मैं उन्हीं को हराकर फ्लाइंग सिख बना, मेरी प्रसिद्धि का कारण आपके पिता थे। 

साल 1958 में टोक्यो में आयोजित किए गए एशियाई खेलों के दौरान मिल्खा सिंह ने पाकिस्तान के अब्दुल खालिक को 200 मीटर दौड़ में हराकर गोल्ड मेडल जीता था। उसके 2 साल बाद मिल्खा ने लाहौर में फिर अब्दुल खालिक को मात दी। 

Milkha Singh rival Abdul Khaliq son said His passing a loss to our family in Pakistan
मिल्खा सिंह - फोटो : social media

खालिक के बेटे ने कहा कि मेरे पिता जी बहुत कम बोलते थे। उन्होंने 1960 में लाहौर में आयोजित भारत-पाकिस्तान एथलेटिक मीट में मिल्खाजी के विरुद्ध 200 मीटर की प्रसिद्ध दौड़ में हार के बारे में शायद ही कभी बात की। इस घटना के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान मिल्खा सिंह के पास गए और उन्हें फ्लाइंग सिख का नाम दिय था।  18 जून 2021 को भारत के महान एथलीट मिल्खा सिंह का कोरोना के चलते चंडीगढ़ में निधन हो गया था। 

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