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बीस सालों से कोच द्रादी ने छोड़ा भारतीय शूटरों का साथ
Sun, 10 Feb 2019 10:10 PM IST
Mukesh Jha
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: Mukesh Jha
Updated Sun, 10 Feb 2019 10:10 PM IST
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भारतीय शॉटगन शूटरों से जुड़े सबसे पुराने विदेशी कोच मार्सेलो द्रादी ने 20 साल बाद भारतीय शूटिंग से अपना नाता तोड़ लिया है। अनुबंध में हुई देरी के चलते उन्होंने यह फैसला लिया। इस बीच उन्हें शॉटगन शूटिंग के मजबूत देश चीन से प्रस्ताव से मिला।
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भारतीय शूटरों और एनआरएआई की मानें तो उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इस साल ओलंपिक क्वालिफिकेशन को ध्यान में रख फेडरेशन और भारतीय शूटर द्रादी के जाने को अच्छा नहीं मान रहे हैं।
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हालांकि जकार्ता एशियाई खेलों के दौरान द्रादी ने अपने ट्यूमर होने का खुलासा किया था। उन्होंने इसका इलाज कराने की बात कही थी। सूत्र बताते हैं कि द्रादी का सफल इलाज हुआ। एशियाई खेलों के बाद भी वह भारत आए और टीम के साथ एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट भी गए। इस दौरान एनआरएआई ने उनके समक्ष अनुबंध बढ़ाने की बात कही थी जिस पर वह राजी भी हो गए थे, लेकिन अनुबंध की प्रक्रिया में हुई देरी और फेडरेशन से कोई जवाब नहीं आने पर उन्होंने चीन के साथ जुडने में भलाई समझी।
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द्रादी का 20 सालों का कार्यकाल काफी उतार चढ़ाव भरा रहा। 2002 में उन्हें हटाया भी गया। उनकेसाथ कई विवाद भी रहे बावजूद इसके मानवजीत संधू, मुहम्मद असब, अंकुर मित्तल जैसे शूटरों को द्रादी ने तैयार किया। इस सब के बावजूद द्रादी भारतीय शॉटगन शूटरों की पहली पसंद बने रहे।
शूटरों के लिए मेंटल ट्रेनर के पक्ष में नहीं एनआरएआई
देश के नामी शूटरों में मेंटल ट्रेनरों के पीछे भागने की होड़ लगी रही है। अभिनव बिंद्रा, गगन नारंग, हीना सिद्धू जैसे शूटर मेंटल ट्रेनरों को तरजीह देते रहे हैं, लेकिन एनआरएआई शूटरों केलिए मेंटल ट्रेनर अनुबंधित करने के पक्ष में नहीं है।
एनआरएआई के अध्यक्ष रणइंदर सिंह का कहना है कि फिल्हाल वह शूटरों के लिए मेंटल ट्रेनर नहीं रखेंगे। उन्हें हाल ही में पता लगा है कि अमेरिका की पुरुष और महिला शूटिंग टीम अत्यधिक मेंटल ट्रेनिंग के चलते खराब हो गई। वह यह जोखिम अपनी टीम केलिए नहीं लेना चाहते। अगर किसी शूटर को लगता है उसे मेंटल ट्रेनर की जरूरत है तो टॉप्स के जरिए ले सकता है। वह उसे नहीं रोकेंगे।