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‘जब मैं रियो में खेल रहा था, मेरे घर की बिजली काट दी गई’
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 29 Aug 2016 04:43 PM IST
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मनोज कुमार
- फोटो : getty
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रियो ओलंपिक में क्वार्टरफाइनल में उज्बेकिस्तान के मुक्केबाज से हारकर बाहर होने वाले बॉक्सर मनोज कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारतीय बॉक्सिंग में हस्तक्षेप करने की मांग की है। फिलहाल भारतीय बॉक्सिंग प्रशासनिक दिक्कतों से गुजर रहा है।
भारतीय बॉक्सिंग को शरशैया पर बताते हुए बॉक्सर मनोज कुमार ने कहा है कि प्रधानमंत्री को इस मामले को जरूर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय बॉक्सिंग संघ को अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग संघ ने निलंबित न किया होता, तो भारत को बॉक्सिंग में मेडल जरूर मिलता। चार साल के प्रतिबंध ने भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।
भारतीय मुक्केबाज ने कहा कि वो पहला राउंड वो जीत गए थे। उन्होंने कहा कि टारगेट ओलंपिक पोडिया स्कीम (टॉप) में उन्हें जून में क्वालिफाई करने के बाद शामिल किया गया था। यह काफी लेट था।
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उन्होंने पूछा है कि भारत में मुक्केबाजों की अगली खेप कौन तैयार कर रहा है। भविष्य में बॉक्सिंग रिंग में भारत के लिए कौन उतरेगा।
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भारतीय बॉक्सिंग को शरशैया पर बताते हुए बॉक्सर मनोज कुमार ने कहा है कि प्रधानमंत्री को इस मामले को जरूर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय बॉक्सिंग संघ को अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग संघ ने निलंबित न किया होता, तो भारत को बॉक्सिंग में मेडल जरूर मिलता। चार साल के प्रतिबंध ने भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।
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भारतीय मुक्केबाज ने कहा कि वो पहला राउंड वो जीत गए थे। उन्होंने कहा कि टारगेट ओलंपिक पोडिया स्कीम (टॉप) में उन्हें जून में क्वालिफाई करने के बाद शामिल किया गया था। यह काफी लेट था।
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उन्होंने पूछा है कि भारत में मुक्केबाजों की अगली खेप कौन तैयार कर रहा है। भविष्य में बॉक्सिंग रिंग में भारत के लिए कौन उतरेगा।
मैं रियो में था और लोगों ने काट दी थी घर की बिजली
मनोज कुमार
- फोटो : getty
वो कहते हैं उन्हें पर्याप्त समर्थन तो दूर, किसी का भी समर्थन नहीं मिला। उन्हें कहीं से भी आर्थिक मदद नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सारी तैयारी उन्होंने अपने भाई राजेश की मदद से की। पिछले चार सालों से भारतीय मुक्केबाजी मर रही है।
मनोज को मापदंडो पर खरा उतरने के बाद न तो अर्जुन पुरस्कार मिला है और न ही उन्हें रेलवे ने अपने वादे के मुताबिक प्रमोशन दिया है। उनका कहना है कि वो सबसे प्रतिभाशाली भले ही न हो, मगर मेहनती हैं।
एक चैनल से बातचीत के दौरान मनोज ने अपना दुख जाहिर करते हुए कहा, “जब मैं रियो में देश के लिए खेल रहा था, पड़ोसी मेरे परिवार को परेशान करते थे। कुछ लोगों ने मेरे घर की बिजली काट दी ताकि मेरा परिवार मुझे खेलते हुए न देख सके। इस तरह के माहौल में कोई कैसे खेल सकता है।”
मनोज को मापदंडो पर खरा उतरने के बाद न तो अर्जुन पुरस्कार मिला है और न ही उन्हें रेलवे ने अपने वादे के मुताबिक प्रमोशन दिया है। उनका कहना है कि वो सबसे प्रतिभाशाली भले ही न हो, मगर मेहनती हैं।
एक चैनल से बातचीत के दौरान मनोज ने अपना दुख जाहिर करते हुए कहा, “जब मैं रियो में देश के लिए खेल रहा था, पड़ोसी मेरे परिवार को परेशान करते थे। कुछ लोगों ने मेरे घर की बिजली काट दी ताकि मेरा परिवार मुझे खेलते हुए न देख सके। इस तरह के माहौल में कोई कैसे खेल सकता है।”