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एशियन गेम्स 2018: नौकरी गई, बेटे का मुंह नहीं देखा पर स्वर्ण जीत लाए मनजीत

Tue, 28 Aug 2018 11:15 PM IST
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, जकार्ता
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, जकार्ता Updated Tue, 28 Aug 2018 11:15 PM IST
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manjit singh win gold medal in asian games 2018
मनजीत सिंह

नौकरी गई, पैदा हुए बेटे का मुंह नहीं देखा पर जींद के मंजीत सिंह ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने का कारनामा कर दिखाया। मंजीत ही नहीं बल्कि उनके साथ दौड़ रहे स्वर्ण पदक के दावेदार जिंसन जॉनसन ने रजत पदक हासिल किया। मंजीत ने एक मिनट 46.15 सेकेंड के साथ अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ समय निकाला।

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कुछ माह पूर्व श्रीराम सिंह का 41 साल पुराना राष्ट्रीय कीर्तिमा तोड़ने वाले जॉनसन ने एक मिनट 46.35 सेकेंड का समय लिया। सिर्फ यही नहीं इन खेलों में पहली बार शामिल की गई चार गुणा चार सौ मीटर मिक्स रिले रेस में भारत की चौकड़ी मुहम्मद अनस, एमआर पूवम्मा, हिमा दास और अरोक्ये राजीव ने तीन मिनट 15.71 सेकेंड के साथ रजत पदक हासिल किया। वहीं दुती चंद 23.00 सेकेंड का अपना सर्वश्रेष्ठ समय निकालते हुए 200 मीटर के फाइनल में पहुंच गईं।
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छोड़ने जा रहे थे एथलेटिक्स अब हैं चैंपियन
बात दो साल पुरानी है जींद के मंजीत सिंह ने यह तय कर लिया था अब एथलेटिक्स में कुछ नहीं रखा है। 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में दौड़ने के बावजूद यह एथलीट ओएनजीसी में कांट्रेक्ट पर लगी नौकरी नहीं बचा पाया था। तब कोच अमरीष कुमार के समझाने पर मंजीत खेल में बने रहे। बस यही धुन थी कि एशियाई खेलों में कुछ कर दिखा कर अपने को साबित करना है। चार माह पहले जून में हुई इंटर स्टेट चैंपियनशिप में जब वह एशियाई खेलों के लिए क्वालिफाई करने को 800 मीटर दौड़ दौड़ने जा रहे थे। उसी दौरान उन्हें पता लगा कि उनके बेटा हुआ है लेकिन मंजीत इन खेलों की तैयारियों को भूटान चले गए और आज तक अपने बेटे का मुंह का नहीं देखा।
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यही मंजीत ने मंगलवार को एशियाई खेलों में 36 साल बाद देश को 800 मीटर का स्वर्ण पदक दिलाया। मंजीत के कोच अमरीष के मुताबिक उसने बहुत त्याग किया है। जिस बेटे का उसने अब तक मुंह नहीं देखा है उसी के जन्म ने उसकी तकदीर बदली है। बेटे के पैदा होते ही उसने इंटर स्टेट में एशियाई खेलों के लिए क्वालिफाई किया और अब यहां गोल्ड जीत लिया। वहीं मंजीत का कहना है कि उन्हें भरोसा था कि वह यहां कुछ न कुछ करके दिखाएंगे।

रोकने की रणनीति को किया फेल

manjit singh win gold medal in asian games 2018
manjeet singh and jinson johnson

मंजीत और जॉनसन को सुबह बताया गया कि उन दोनों को कतर और बहरीन के एथलीट ब्लाक कर सकते हैं। उन्हें इसे 500 मीटर में तोड़ना है। अगर ऐसा नहीं होता है अंतिम 100 मीटर में सीधी रेस लगानी है। मंजीत पहले 500 मीटर में ऐसा नहीं कर पाएए लेकिन उन्होंने अंतिम 100 मीटर में सीधी रेस का जबरदस्त फर्राट भर गोल्ड जीत लिया। मंजीत के पिता हरियाणा में दूध बेचते हैं। गुवहाटी इंटर स्टेट में वह सोच रहे थे कि उनका समय एक मिनट 48 सेकेंड के आसपास आएगा। लेकिन उन्होंने 1ण्46ण्24 सेकेंड का समय लिया और यही उनके लिए बड़े बदलाव का कारण बन गया।

रजत जीतने के बाद हिमा की मांसपेशियों में आया खिचाव
बहरीन की चौकड़ी ने मिक्स रिले रेस में भारत को पछाड़ दियाए लेकिन हिमा दास रेस पूरी करने के बाद ट्रैक पर गिर पड़ीं और करहाने लगीं। उनकी जांघ की मांसपेशियों में खिचाव आ गया है। इससे पहले 200 मीटर के सेमीफाइनल में फॉल्स स्टार्ट के चलते उन्हें डिसक्वालिफाई कर दिया गया था।  

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