फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Sports ›   Other Sports ›   Japan is tied with deal cannot cancel Olympic 70 percent population is against Summer Games but IOC is adamant

टोक्यो ओलंपिक 2021: कोविड के चलते 70 फीसद जनता आयोजन के खिलाफ पर जापान अनुबंध के कारण मजबूर

Mon, 17 May 2021 03:57 PM IST
प्रियंका तिवारी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: प्रियंका तिवारी Updated Mon, 17 May 2021 03:57 PM IST
सार

जापान में महामारी की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। यहां एक सर्वेक्षण से यह बात सामने आई कि 70 प्रतिशत तक जापानी टोक्यो ओलंपिक को रद्द करने के पक्ष में हैं।

विज्ञापन
Japan is tied with deal cannot cancel Olympic 70 percent population is against Summer Games but IOC is adamant
टोक्यो ओलंपिक - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इसी साल जुलाई में टोक्यो ओलंपिक शुरू होने वाला है जिस पर कोरोना महामारी का संकट आ खड़ा हुआ है। जापान में महामारी की वजह से खेलों को रद्द करने की मांग तेज होती जा रही है। एक सर्वे के मुताबिक जापान की 70 फीसद आबादी नहीं चाहती कि ओलंपिक खेलों का आयोजन हो, लेकिन इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) ओलंपिक का आयोजन कराने पर अड़ी हुई है। हाल ही में जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने कहा है कि ओलंपिक का आयोजन सरकार की प्राथमिकता नहीं है, लेकिन अंत में फैसला आईओसी का होगा। दरअसल, जापान एक अनुबंध के तहत बंधा हुआ है, जिसके अनुसार वह ओलंपिक के आयोजन को रोक नहीं सकता।

विज्ञापन

 

आईओसी ही ओलंपिक के आयोजन को रद्द कर सकता है

अंतरराष्ट्रीय खेलों के वरिष्ठ वकील एलेक्जेंड्रे मिगुएल मेस्त्रे ने कहा कि ओलंपिक आईओसी की एक्सक्लूसिव प्रॉपर्टी है। आईओसी और मेजबान टोक्यो शहर के बीच हुए अनुबंध के तहत यहां सिर्फ आईओसी ही ओलंपिक के आयोजन को रद्द कर सकता है। टोक्यो प्रशासन के पास यह अधिकार नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि यदि आईओसी को ऐसा लगे कि मेजबान शहर में युद्ध है या लॉ एंड ऑर्डर विफल है, जिससे खिलाड़ियों को खतरा है, तब वह आयोजन को रद्द कर सकता है। वैसे कोरोना महामारी को भी ऐसे खतरे के रूप में देखा जा सकता है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

अनुबंध को खत्म करने पर जापान को होगा नुकसान

यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न के प्रोफेसर जैक एंडरसन के अनुसार यदि जापान एकतरफा अनुबंध खत्म करता है तो उसे बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ेगा क्योंकि जापान और आईओसी की ब्रॉडकास्टिंग स्पॉन्सरशिप में अरबों रुपये की हिस्सेदारी है। अनुबंध टूटने से इंश्योरेंस कंपनियां आयोजकों के प्रमुख खर्चों को कवर तो करेंगी, लेकिन वे अप्रत्यक्ष खर्चों (होटल, रेस्तरां, पर्यटन, हॉस्पिटल पर हुआ खर्च) को कवर नहीं करेंगी जिससे जापान के स्वास्थ्य और पर्यटन सेक्टर को भारी नुकसान होगा।

विज्ञापन

साख की बात

ओलिंपिक का आयोजन रद्द होने से जापान की साख पर भी बुरा असर पड़ेगा क्योंकि अगले साल जापान का धुर विरोधी चीन विंटर ओलंपिक का आयोजन कर रहा है। पिछली बार जापान ने 1964 में ओलिंपिक की मेजबानी की थी। तब उस आयोजन को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान के पुनर्विकास से जोड़कर देखा गया था। फिलहाल जापान लंबे समय से आर्थिक ठहराव से जूझ रहा है इसलिए इस आयोजन को देश के पुनरुत्थान के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ते विवाद के बाद भी टोक्यो में ओलंपिक का आयोजन होगा, लेकिन यह किस तरह से होगा इस पर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed