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फेडरेशन ने लिया अनोखा फैसला, अब वेटलिफ्टरों को देनी होगी डोपिंग की परीक्षा
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 07 Nov 2018 03:10 AM IST
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dope test
डोपिंग के फेर में फंसी इंटरनेशनल वेटलिफ्टिंग फेडरेशन (आईडब्लूएफ) ने अनोखा फैसला लिया है। अब अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में खेलने वाले दुनिया के हर वेटलिफ्टर को डोपिंग की परीक्षा देनी होगी।
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यह परीक्षा तब तक देनी होगी जब तक वेटलिफ्टर 80 प्रतिशत अंक हासिल नहीं कर लेता है। यह अंक हासिल करने के बाद ही फेडरेशन की ओर से वेटलिफ्टर को प्रमाण पत्र दिया जाएगा जिसकी वैधता एक साल रहेगी। एक साल बाद फिर से परीक्षा देनी होगी।
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डोपिंग पर लगाम लगाने और इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए ही आईडब्लूएफ ने यह अनोखी पहल की है, जिसकी जानकारी उसने इंडियन वेटलिफ्टिंग फेडरेशन (आईडब्लूएलएफ) को भी दी है। आईडब्लूएफ ने ऑन लाइन परीक्षा का प्रावधान रखा है। इसके लिए उसने प्रत्येक खिलाड़ी की आईडी खोलते हुए वीडियो अपलोड किए हैं।
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इन वीडियो को देखने के बाद ही खिलाड़ी केसामने प्रश्न आएंगे और उन्हें इनका जवाब देना होगा। अगर जवाब में 80 प्रतिशत उत्तर सही पाए गए तो तुरंत ही उसे प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो उसे लगातार परीक्षा देनी होगी। फेडरेशन ने अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में खेलने के लिए यह परीक्षा अनिवार्य कर दी है।
भारतीय खिलाड़ी अश्गाबाट में देंगे परीक्षा
अश्गाबाट (तुर्कमेनिस्तान) में चल रही विश्व चैंपियनशिप में खेलने गए भारतीय वेटलिफ्टर भी यह परीक्षा वहीं देने जा रहे हैं। फेडरेशन ने इसके लिए एक विशेष बूथ खोला है। जिस किसी लिफ्टर को यह परीक्षा देने में दिक्कत आ रही है वह इस बूथ में जाकर इसमें शामिल हो सकता है।
भारत के पांच खिलाड़ी झिली बेहरा, राखी हलधर, गुरदीप सिंह, अजय सिंह और अचिंत्य यहां खेल रहे हैं। ये सभी बूथ में जाकर परीक्षा देंगे। आईडब्लूएलएफ के सेक्रेटरी जनरल सहदेव यादव का कहना है कि इंटरनेशनल फेडरेशन की यह पहल अच्छी है। इस परीक्षा से वेटलिफ्टर डोपिंग के प्रति जागरूक होंगे। इससे डोप मामलों में कमी आएगी। वह भारत में भी इसे लागू करवाएंगे।