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ईरान की पहली ओलंपिक पदक विजेता कीमिया अलीजादेह अब रिफ्यूजी टीम में
Thu, 10 Jun 2021 08:38 AM IST
Kuldeep Singh
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 10 Jun 2021 08:38 AM IST
सार
- कीमिया अलीजादेह ओलंपिक में पदक जीतने वाली अपने देश की पहली महिला बनी
- 29 सदस्यी रिफ्यूजी टीम का चयन किया है आईओसी ने टोक्यो ओलंपिक के लिए
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ईरान की कीमिया अलीजादेह (ताइक्वांडो खिलाड़ी)
- फोटो : twitter
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विस्तार
ईरान के कारज शहर के दस्तकार की बिटिया कीमिया अलीजादेह बचपन से अन्य लड़कियों से हटकर कुछ अलग करना चाहती थी। तमाम बंदिशों के बावजूद उसने खेल को अपनाकर ऐसा किया भी और अपनी अलग पहचान बनाई।
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रियो ओलंपिक 2016 में अलीजादेह ने वो कर दिखाया जो अभी तक किसी ईरानी महिला ने नहीं किया था। तब 18 वर्षीय अलीजादेह ने ताइक्वांडो के 57 किग्रा भार वर्ग में कांस्य जीतकर इतिहास रच दिया था।
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वह ओलंपिक में पदक जीतने वाली अपने देश की पहली महिला बनी। घर वापसी पर नायिका के रूप में सम्मानित किया गया तो सुनामी का उपनाम दिया गया। वह देश की महिलाओं के लिए नई उम्मीद बन गई।
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अलीजादेह की उम्मीदों को भी नए पंख लग गए और वह 4 साल बाद टोक्यो में होने वाले ओलंपिक में अपने कांसे को सोने में बदलने के सपने देखने लगी, लेकिन देश के लिए स्वर्ण जीतने का उनका सपना अधूरा ही रह गया।
ओलंपिक से 7 माह पहले जनवरी 2020 में अचानक अलीजादेह खुद को ईरानी की लाखों उत्पीड़ित महिलाओं में से एक बताते हुए देश छोड़कर भाग गई। अलीजादेह ने हिम्मत नहीं हारी और टोक्यो में खेलने के सपने को हकीकत में बदल दिया।
वह ईरान के झंडे तले नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति आईओसी के झंडे तले खेलकर पीला तमगा जीतने की कोशिश करेंगी।आईओसी ने रिफ्यूजियो को जो टीम घोषित की है उसमें अलीजादेह भी है।
रहूंगी ईरान की बिटिया ही
मैं ओलंपिक के विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने की उम्मीद करती हूं मेरी इच्छा नहीं बदलती है लेकिन लक्ष्य हासिल करने के तरीके मैं जरूर बदलाव आया है मैं किसी भी झंडे के नीचे खेली इससे कोई फर्क नहीं पड़ता मैं जहां भी रहूं ईरान की बिटिया ही रहूंगी समानता के लिए लड़ना जारी रखूंगी ताकि सभी महिला खिलाड़ी अपने सपने को पूरा करने का जज्बा दिखा पाए। -- अलीजादेह
2014 में बनी थी यूथ ओलंपिक चैंपियन
अलीजादेह 2014 यूथ ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर सुर्खियों में आई थीं। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद 2015 में सीनियर विश्व चैंपियनशिप में कांसा और 2017 में रजत पदक जीता। वहीं 2018 में एशियन चैंपियनशिप में भी कांसा जीता।