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कबड्डी में पूरे दिन बनी रही भ्रम की स्थिति, ट्रॉयल्स के लिए नहीं पहुंची भारतीय टीम
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 16 Sep 2018 12:33 AM IST
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कबड्डी
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भारतीय एमेच्योर कबड्डी महासंघ (एकेएफआई) के ट्रायल्स में शनिवार को शुरू से लेकर आखिर तक भ्रम की स्थिति बनी रही, जिसमें विरोधी संघ के खिलाड़ी भारतीय टीम के खिलाफ मैच खेलने के लिए मौजूद थे। भारत की महिला या पुरुष राष्ट्रीय टीमों में से कोई भी मैच के लिए नहीं पहुंची।
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दिल्ली हाईकोर्ट के दो अगस्त को दिए गए आदेश के आधार पर इस मैच का आयोजन किया गया था, लेकिन विरोधी गुट न्यू कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनकेएफआई) के याचिकाकर्ता ने आदेश का पूरी तरह से गलत अर्थ लगा दिया था।
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एनकेएफआई ने पिछले महीने बंगलूरू में अपने ट्रायल्स का आयोजन करके एशियाई खेलों में भाग लेने वाली राष्ट्रीय टीमों के खिलाफ ट्रायल मैच को देखते हुए पुरुष और महिला टीम का चयन किया था। एनकेएफआई का आरोप था कि जकार्ता एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीमों के चयन में काफी गड़बड़ियां की गईं।
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दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश खंड (नौ) में कहा गया है, 'भारतीय एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन प्रतिवादी नंबर चार चयन प्रक्रिया का आयोजन करेगा जो 15 सितंबर 2018 को 11 बजे शुरू होगी।' इसमें कहीं भी यह जिक्र नहीं किया गया है कि ट्रायल प्रक्रिया के लिए किसी राष्ट्रीय टीम को की जरूरत पड़ेगी।
इस संबंध में जब याचिकाकर्ता के वकील भरत नागर से पूछा गया कि अदालत के आदेश में कहीं भी जिक्र नहीं है कि चयन ट्रायल्स के लिए भारतीय टीम की जरूरत पड़ेगी, उन्होंने कहा, 'यह एक व्याख्या थी। हम अपने जवाब में कहेंगे कि हमारी टीम ट्रायल्स के लिए आई थी लेकिन भारतीय टीम नहीं आई।'
जब उनसे पूछा गया कि जब केवल ट्रायल्स का ही जिक्र किया गया है तब मैच के लिए तैयार प्रतिद्वंद्वी गुट (एनकेएफआई) के खिलाड़ी अन्य दावेदारों के साथ क्यों नहीं खेलते हैं, वकील ने कहा, 'लेकिन हम यहां केवल राष्ट्रीय टीम से खेलने के लिए आए हैं।'
एनकेएफआई के उन सभी खिलाड़ियों के लिए यह निराशाजनक था जिन्हें ट्रायल के वादे के साथ यहां लाया गया था। असल में पता चला है कि प्रतिद्वंद्वी संघ के बैनर तले यहां पहुंचे अधिकतर खिलाड़ी लंबे समय से राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा नहीं थे।
लड़कियों का ओपन ट्रायल्स का आयोजन
आखिर में एकेएफआई ने अदालत के आदेशों के अनुसार एक ओपन ट्रायल्स का आयोजन किया जिसमें सभी आयु वर्गों की लड़कियों ने पर्यवेक्षक न्यायमूर्ति एस पी गर्ग के सामने मैच खेले। एकेएफआई का केवल एक पदाधिकारी सहायक सचिव देवराज चतुर्वेदी ही इस अवसर पर मौजूद थे। उनसे जब ट्रायल्स के आयोजन के तरीके पर सवाल किया गया तो वह जवाब देने से बचने की कोशिश करते रहे।
चतुर्वेदी से पूछा गया कि 'ट्रायल्स क्यों आयोजित किए जा रहे हैं?' उन्होंने कहा, 'मैं केवल माननीय अदालत के आदेश का पालन कर रहा हूं।' उनसे पूछा गया कि अदालत का आदेश वास्तव में क्या है, तो उनका जवाब था, 'मैं नहीं जानता कि अदालत का आदेश क्या है। आप लोग ही कृपा करके उसे पढ़ लो।' उनसे जब पूछा गया कि अंडर-16 और अंडर-19 वर्ग की लड़कियां जब अपना मैच जीत जाएंगी तब क्या होगा तो उन्होंने कहा कि मैं नहीं जानता।
चतुर्वेदी ने कहा, 'कृपा करके मुझे बख्श दो क्योंकि मैं वेतनभोगी कर्मचारी हूं। मेरा पद भले ही सहायक सचिव का है लेकिन मैं वेतनभोगी हूं। मेरा काम रेफरी का इंतजाम करना और व्यवस्था देखना है और मैं अपनी यह भूमिका निभा रहा हूं।'