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कार्यकाल: भाला फेंक के मुख्य कोच उवे हॉन हटाए गए, एएफआई ने कहा- प्रदर्शन से खुश नहीं थे
Mon, 13 Sep 2021 10:48 PM IST
Rajeev Rai
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rajeev Rai
Updated Mon, 13 Sep 2021 10:48 PM IST
सार
एएफआई ने सोमवार को घोषणा की कि उसने भाला फेंक के राष्ट्रीय कोच उवे हॉन से नाता तोड़ दिया है। एएफआई ने बताया कि वह कोच के प्रदर्शन से खुश नहीं था और अब जल्द ही दो नए विदेशी कोच नियुक्त करेगा।
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कोच उवे हॉन के साथ नीरज चोपड़ा
- फोटो : social media
विस्तार
टोक्यो ओलंपिक 2020 खत्म हो चुका है। भारत के लिहाज से इस बार का ओलंपिक बेहद खास रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने इस बार रिकॉर्ड सात पदक जीते जिसमें आखिरी दिन नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। नीरज की सफलता के पीछे उनके कोच उवे हॉन का बड़ा योगदान था। हालांकि ओलंपिक की समाप्ति के बाद भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने नीरज के कोच उवे हॉन से नाता तोड़ दिया है।
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एएफआई ने सोमवार को घोषणा की कि उसने भाला फेंक के राष्ट्रीय कोच उवे हॉन से नाता तोड़ दिया है। एएफआई ने बताया कि वह कोच के प्रदर्शन से खुश नहीं था और अब जल्द ही दो नए विदेशी कोच नियुक्त करेगा। बता दें कि पूर्व विश्व रिकार्ड धारक 59 वर्षीय जर्मन हॉन का अनुबंध टोक्यो ओलंपिक तक ही था।
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एएफआई अध्यक्ष आदिल सुमरिवाला ने कहा, ‘हम दो नए कोच की नियुक्ति करने जा रहे हैं तथा हम उवे हॉन को बदल रहे हैं क्योंकि हम उनके प्रदर्शन से खुश नहीं हैं। हम तूर (गोला फेंक के एथलीट ताजिंदरपाल सिंह तूर) के लिए भी विदेशी कोच देख रहे हैं।’
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सुमरिवाला महासंघ की कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस बैठक में एएफआई की योजना समिति के अध्यक्ष ललित भनोट और उपाध्यक्ष अंजू बॉबी जार्ज ने भी हिस्सा लिया।
बता दें कि हॉन को ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा और टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने वाले दो अन्य एथलीटों शिवपाल सिंह और अनु रानी जैसे खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए नवंबर 2017 में एक साल के लिए मुख्य कोच नियुक्त किया गया था। चोपड़ा राष्ट्रमंडल और एशियाई खेल 2018 में उनकी निगरानी में खेले लेकिन इसके बाद जर्मनी के ही क्लॉस बार्टोनीज यह भूमिका निभाने लगे थे।
गौरतलब है कि हॉन ने ओलंपिक से पहले यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और एएफआई ने अनुबंध स्वीकार करने के लिए उन्हें ‘ब्लैकमेल’ किया था। दोनों संस्थाओं ने हालांकि इस आरोप को खारिज कर दिया था।