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दुखद: भारतीय मुक्केबाजी टीम के पूर्व कोच ओपी भारद्वाज का निधन, मिला था पहला द्रोणाचार्य पुरस्कार
Fri, 21 May 2021 07:50 PM IST
कुमार संभव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार संभव
Updated Fri, 21 May 2021 07:50 PM IST
सार
ओपी भारद्वाज को 1985 में द्रोणाचार्य पुरस्कार शुरू किए जाने पर बालचंद्र भास्कर भागवत (कुश्ती) और ओएम नांबियार (एथलेटिक्स) के साथ प्रशिक्षकों को दिए जाने वाले इस सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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ओपी भारद्वाज
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मुक्केबाजी में भारत के पहले द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच ओपी भारद्वाज का लंबी बीमारी और उम्र संबंधी परेशानियों के कारण शुक्रवार (21 मई) को निधन हो गया। वह 82 वर्ष के थे। उनकी पत्नी संतोष का 10 दिन पहले ही बीमारी के कारण निधन हो गया था।
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बता दें कि भारद्वाज को 1985 में द्रोणाचार्य पुरस्कार शुरू किए जाने पर बालचंद्र भास्कर भागवत (कुश्ती) और ओएम नांबियार (एथलेटिक्स) के साथ प्रशिक्षकों को दिए जाने वाले इस सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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पूर्व मुक्केबाजी कोच और भारद्वाज के परिवार के करीबी मित्र टी एल गुप्ता ने बताया, 'स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों के कारण वह पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थे और अस्पताल में भर्ती थे। उम्र संबंधी परेशानियां भी थीं। वहीं, 10 दिन पहले अपनी पत्नी के निधन से भी उन्हें आघात पहुंचा था। बता दें कि भारद्वाज 1968 से 1989 तक भारतीय राष्ट्रीय मुक्केबाजी टीम के कोच थे। वह राष्ट्रीय चयनकर्ता भी रहे।
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उनके कोच रहते हुए भारतीय मुक्केबाजों ने एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और दक्षिण एशियाई खेलों में पदक जीते। गुप्ता ने कहा, 'उन्होंने पुणे में सेना स्कूल एवं शारीरिक प्रशिक्षण केंद्र में अपना करियर शुरू किया और सेना मशहूर कोच बने। राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) ने 1975 में जब मुक्केबाजी में कोचिंग डिप्लोमा का प्रस्ताव रखा तो भारद्वाज को पाठ्यक्रम की शुरुआत के लिए चुना गया। मुझे गर्व है कि मैं उनके शुरुआती शिष्यों में शामिल था।' उन्होंने 2008 में कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी को भी दो महीने तक मुक्केबाजी के गुर सिखाए थे।
पूर्व राष्ट्रीय कोच गुरबख्श सिंह भी उनके शुरुआती शिष्यों में शामिल थे। सिंह ने कहा, 'मेरी भारद्वाज जी के साथ बहुत अच्छी दोस्ती थी। मैं एनआईएस में उनका शिष्य और सहायक था। उन्होंने ही भारतीय मुक्केबाजों को आगे तक पहुंचाने की नींव रखी थी।'
राष्ट्रीय महासंघ के पूर्व महासचिव ब्रिगेडियर (सेवानिवृत) पीके एम राजा ने कहा कि भारद्वाज का खेल में अपने योगदान के लिए बहुत सम्मान था। वह सेना खेल नियंत्रण बोर्ड के दिग्गज थे। सही मायनों में वह बेहतरीन कोच और प्रभावशाली व्यक्ति थे।