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जज्बा: टोक्यो ओलंपिक से पहले नीरज चोपड़ा का हुआ था ऑपेरशन, वापसी के बाद पहले टूर्नामेंट में 87.68 मीटर फेंका भाला

Sun, 08 Aug 2021 05:04 PM IST
ओम. प्रकाश स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ओम. प्रकाश Updated Sun, 08 Aug 2021 05:04 PM IST
सार

टोक्यो ओलंपिक्स से पहले नीरज चोपड़ा की बाह का ऑपरेशन हुआ था। जब वह चोटिल थे तो उन्हें लगा कि उनका करियर समाप्त हो जाएगा। लेकिन नीरज ने हार नहीं मानीं और ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर ही दम लिया। 

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Indian Athlete Neeraj Chopra had an operation before the Tokyo Olympics threw 87.68 meters in the first tournament after his return and won gold medal for country
नीरज चोपड़ा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारतीय एथलीट नीरज चोपड़ा ने 7 अगस्त को टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रच दिया। उन्होंने पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। भारतीय इतिहास में अगर देखा जाए तो ओलंपिक में यह पहला मौका है जब किसी एथलीट ने ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। भारत 13 साल बाद ओलंपिक में व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहा। इससे पहसे साल 2008 में बीजिंग ओलंपिक के दौरान भारत के अभिनव बिंद्रा ने निशानेबाजी में गोल्ड मेडल पर निशाना लगाया था। नीरज के ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद देश भर से उन्हें प्यार और शुभकामनाएं मिल रहीं। इसके अलावा उन्हें अब तक कई राज्य सरकारों, संस्थाओं और व्यक्तिगत रूप से करोड़ों रुपये का इनाम दिए जाने की घोषणा की जा चुकी है। 

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फाइनल मुकाबले में नीरज ने पहले प्रयास में 87.03 मीटर दूर भाला फेंका। दूसरी कोशिश में 87.58 मीटर का थ्रो किया। तीसरे प्रयास में नीरज 76.79 मीटर दूर थ्रो कर सके। इस स्पर्धा में 12 खिलाड़ियों में से आठ ने दूसरे और फाइनल राउंड में जगह बनाई। इसके बाद चौथे और पांचवें प्रयास में नीरज से फाउल हुआ लेकिन अच्छी बात यह रही कि वह शुरू से लेकर अंत तक पहले स्थान पर डटे रहेए। इसके बाद छठे प्रयास में नीरज ने 84.24 मीटर का थ्रो किया। लेकिन नीरज को स्वर्ण पदक दिलाने का आधार दूसरी कोशिश में 87.58 मीटर का थ्रो रहा। उनकी इस दूरी को कोई भी प्रतिद्वंदी पार नहीं कर पाया। इसके बाद नीरज ने ओलंपिक में इतिहास रच दिया।

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आज नीरज की सफलता पर भले ही पूरा देश नाज कर रहा हो लेकिन स्वर्ण पदक जीतने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर जहां आपको करोड़ों लोग देख रहे हैं और सब गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीद कर रहे हैं किसी के लिेए आसान नहीं है। लेकिन नीरज ने अपने जुझारूपन और जज्बे से साबित कर दिया कि अगर लगन पक्की हो तो कुछ भी मुमकिन नहीं है। ओलंपिक जैसे महाकुंभ में पदक जीतने के लिए मेहनत, लगन, त्याग और तपस्या की जरुरत होती है। 

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नीरज के लिए स्वर्ण पदक जीतने का तक का सफर कतई आसान नहीं रहा। इस दौरान वह चोटिल हुए और उन्हें लगा कि अब उनका करियर समाप्त हो जाएगा। एक साक्षात्कार के  दौरान नीरज ने कहा था कि अप्रैल 2019 में जब में वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए ट्रेनिेंग कर रहा था तो थ्रो के दौरान मुझे अपनी कोहनी में दर्ज महसूस हुआ। जिसके बाद एमआरआई स्कैन कराया तो हड्डी के कुछ टुकड़े दिखाई दिए। 

नीरज ने कहा इसके बाद मैंने एशियाई चैंपियनशिप को छोड़ दिया और सर्जरी करवाई। जब मैं रिकवर हो रहा था तो वे महीने मेरे लिए काफी कठिन थे। इस दौरान मैं उन सभी प्रतियोगिताओं को देख रहा था कि जिनमें मुझे होना चाहिए था। उन्होंने कहा तब विश्व चैंपियनशिप में पदक 85-86 मीटर का थ्रो करके जीते गए थे। ऐसा मैं भी कर सकता था। 2020 में मैंने मजबूती से वापसी की और दक्षिण अफ्रीका में खेली गई पहली स्पर्धा में मैं 87.68 मीटर दूर भाला फेंकने में सफल रहा। 

साल 2020 दुनिया भर मे किसी के लिए अच्छा नहीं रहा। कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के चलते अन्य खेलों की तरह जेवलिन थ्रो की स्पर्धाओं को भी रद्द कर दिया गया। ऐसे में नीरज ने हार नहीं मानीं और लगातार मेहनत और ट्रेनिेंग करते है। नीरज का एक ही लक्ष्य था कि मुझे ओलंपिक में सिर्फ गोल्ड मेडल ही जीतना है। इसी इरादे के साथ वह टोक्यो ओलंपिक गए। जब पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा का फाइनल के लिए क्वालीफिकेशन राउंड हुआ तो उसमें उन्होंने दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी को मात दी। शायद नीरज ने क्वालीफिकेशन राउंड से ही स्पष्ट कर दिया था कि उनका इरादा सिर्फ स्वर्ण पदक जीतना है। आखिरकार 7 अगस्त को उन्होंने भाला फेंक स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर अपना और देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। 

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