लंबे बाल पड़ गए भारी, 'सरदार पहलवान' का रिंग में डेब्यू करने का शाही सपना हुआ धराशायी
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भारत के सबसे बड़े दंगल स्टार जश्कवर गिल अपना बहुप्रतीक्षित इंटरनेशनल डेब्यू नहीं कर सके। इसकी वजह यह रही कि तुर्की में वर्ल्ड रैंकिंग टूर्नामेंट के आयोजकों ने उन्हें पटका पहनकर स्पर्धा में हिस्सा लेने की इजाजत नहीं दी।
अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती नियमों में खिलाड़ियों को हेडगियर पहनना होता है ताकि बाउट के दौरान विरोधी को किसी प्रकार की चोट या नुकसान नहीं हो। मगर इस्तांबुल में 28 जुलाई को रेफरी ने जोर दिया कि गिल के बाल महिला स्पर्धियों जैसे हैं। 25 वर्षीय सिख पहलवान ने धार्मिक आस्थाओं का हवाला देते हुए बाल छोटे कराने से इंकार किया तो पहले राउंड में उनके विरोधी को वॉकओवर दे दिया गया।
अंतर्राष्ट्रीय इकाई यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) और तुर्की में मेजबान एसोसिएशन ने इस मामले को ऐसे ही जाने दिया, भारतीय अधिकारियों का कहा कि उनकी याचिका को सुना नहीं गया। मिट्टी पर अपनी पहलवानी से फैंस का दिल जीतने वाले गिल के लिए यह किसी सपने के चकनाचूर होने से कम नहीं।
गिल ने बताया अपना दर्द और...
दंगल स्टार जश्कवर गिल ने कहा, 'मैंने रेफरी से कहा कि मेरे बाल लंबे हैं और मुझे पटका से इसे बांधने की जरूरत है। मैंने उन्हें बताया कि धार्मिक आस्था के चलते मेरे बाल बड़े हैं। मेरे कोच ने सभी से बात करने की कोशिश की, लेकिन कहीं बात नहीं बनी। उन्होंने मुझे इसमें हिस्सा नहीं लेने दिया।' बता दें कि दंगल में गिल 'जसा पट्टी' के नाम से मशहूर हैं।
गिल के फेसबुक पर हजारों फैन पेज हैं। वह कई पंजाबी पॉप सोंग्स के प्रेरणा है और बच्चों के लिए सुपरहीरो भी, जिन्होंने उनके नाम का टैटू गुदवाया है। पिछले सीजन में गिल ने करीब 1 करोड़ रुपए की इनामी राशि जीती। उन्होंने अपने करियर में अब तक तीन अल्टो कार, 70 बुलेट मोटरसाइकिल और दो ट्रेक्टर जीते हैं। गिल का सपना भारत का प्रतिनिधित्व करना था, जिसकी वजह से पंजाब पुलिस के कांस्टेबल ने राष्ट्रीय कैंप में हिस्सा लिया। मगर उन्होंने बिना पटका के पहलवानी नहीं की।
गिल ने कहा, 'मैंने कोच से कहा कि अगर मैं पहलवानी करता भी तो वहां दिमाग नहीं लगा होता। पहलवानी करने की मेरी हिम्मत नहीं होती क्योंकि यह नियम के मुताबिक था। कई सिख पहलवान वहां थे, और यह शायद पहला मौका है जब ऐसा हुआ हो। मैं निराश हूं, लेकिन अभी कुछ कर नहीं सकता हूं।' भारतीय फ्रीस्टाइल टीम के प्रमुख कोच जगमिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने मामले को ध्यान में लाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया।
सब बचने का खोजते रहे रास्ता
उन्होंने कहा, 'हमने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया, लेकिन वह समझ नहीं सके। जब मैंने उन्हें कहा कि उसके लंबे बाल है तो निदेशक ने कहा कि लंबे बालों वाली लडकियां भी यहां रेसलिंग कर रही हैं।उन्होंने कहा कि अगर वह अपने बाल कड़े करके हिस्सा ले सकता है तो यहां मैट पर कुश्ती कर सकता है।'
हालांकि तुर्की कुश्ती संघ ने इस घटना में किसी प्रकार का हाथ होने की बात से इंकार किया है। संघ ने कहा, 'हमारी इसमें कोई गलती नहीं है। यूडब्ल्यूडब्ल्यू के एक दल ने टूर्नामेंट आयोजित किया और सभी नियम लागू किए गए। हमारे हाथ में नियम बदलना नहीं था। भारतीय कुश्ती संघ को यूडब्ल्यूडब्ल्यू से पूछने की जरूरत है कि उनके पहलवान को हिस्सा क्यों नहीं लेने दिया गया।'
वहीं यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने कहा कि वह कोई मदद नहीं कर सकते। यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने अपने बयान में कहा, 'हमें भारत की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली है। इसलिए हम इस मामले पर कुछ नहीं बोल सकते।'