{"_id":"57da32344f1c1bb53dd49101","slug":"devendra-jhajharia-signed-a-deal-with-his-daughter-for-paralympic-gold","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"देवेंद्र के वर्ल्ड रिकॉर्ड के पीछे 6 साल की बेटी का है ‘खास रोल’","category":{"title":"Other Sports","title_hn":"अन्य खेल","slug":"other-sports"}}
देवेंद्र के वर्ल्ड रिकॉर्ड के पीछे 6 साल की बेटी का है ‘खास रोल’
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 15 Sep 2016 12:11 PM IST
विज्ञापन
देवेंद्र झांझरिया
- फोटो : getty
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पैरालंपिक गेम्स में लगातार दूसरी बार वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीतने वाले देवेंद्र झांझरिया की स्वर्णिम सफलता में उनकी 6 साल की बेटी का भी अहम रोल है। झांझरिया के बेटी, जिया, उनके साथ ट्रेनिंग पर जाती थी।
रियो पैरालंपिक में जाने से पहले झाझरिया ने अपनी बेटी के साथ एक ‘समझौता’ किया था। उनकी बेटी ने कहा कि यदि वो इस बार वो LKG में टॉप करेंगी तो पापा देवेंद्र उनके लिए रियो में गोल्ड जीतेंगे।
देवेंद्र ने एक दिन पहले 63.97 मीटर दूरी भाला फेंक कर रियो पैरालंपिक में वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता था। यह देवेंद्र का पैरालंपिक में दूसरा गोल्ड मेडल था। भारत अब तक पैरालंपिक में 2 गोल्ड समेत कुल 4 मेडल जीत चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
रियो पैरालंपिक में जाने से पहले झाझरिया ने अपनी बेटी के साथ एक ‘समझौता’ किया था। उनकी बेटी ने कहा कि यदि वो इस बार वो LKG में टॉप करेंगी तो पापा देवेंद्र उनके लिए रियो में गोल्ड जीतेंगे।
विज्ञापन
देवेंद्र ने एक दिन पहले 63.97 मीटर दूरी भाला फेंक कर रियो पैरालंपिक में वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता था। यह देवेंद्र का पैरालंपिक में दूसरा गोल्ड मेडल था। भारत अब तक पैरालंपिक में 2 गोल्ड समेत कुल 4 मेडल जीत चुका है।
विज्ञापन
"मैेने टॉप कर लिया है, अब आपकी बारी है"
Devendra Jhajharia
- फोटो : Reuters
पैरालंपिक में दो गोल्ड जीतने वाले इकलौते भारतीय देवेंद्र झांझरिया ने एक इंटरव्यू में कहा कि उनकी बेटी ने उन्हें फोन कर कहा, “मैंने टॉप कर लिया है, अब आपकी बारी है। उसकी यह बात मेरे कानों में गुंजती रही।”
अपना ही वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने वाले झाझरिया ने कहा, “वो सबसे ज्यादा खुश होगी। मैं इंतजार करूंगा कि वो जागे और मुझसे बात करे।”
देवेंद्र सुबह 5 बजे तक जागे, ताकि अपने परिवार से बात कर सकें। उन्होंने कहा, “अब क्या सोना, अब हमें कुछ नहीं होगा। हम तो राष्ट्रीय ध्वज के साथ सेलिब्रेशन करेंगे।”
देवेंद्र ने 2004 एथेंस पैरालंपिक में भी गोल्ड जीता था। उसके बाद 2008 और 2012 में उनकी कैटगरी F46 को शामिल नहीं किया गया।
अपना ही वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने वाले झाझरिया ने कहा, “वो सबसे ज्यादा खुश होगी। मैं इंतजार करूंगा कि वो जागे और मुझसे बात करे।”
देवेंद्र सुबह 5 बजे तक जागे, ताकि अपने परिवार से बात कर सकें। उन्होंने कहा, “अब क्या सोना, अब हमें कुछ नहीं होगा। हम तो राष्ट्रीय ध्वज के साथ सेलिब्रेशन करेंगे।”
देवेंद्र ने 2004 एथेंस पैरालंपिक में भी गोल्ड जीता था। उसके बाद 2008 और 2012 में उनकी कैटगरी F46 को शामिल नहीं किया गया।
“मेरा बेटा मुझे नहीं पहचानता”
Devendra Jhajharia
- फोटो : Reuters
अपनी निजी जिंदगी के बारे में देवेंद्र झांझरिया कहते हैं कि वो बहुत कम ही घर जा पाते हैं। खुद को इंजरी से दूर रखने के लिए वो कड़ी ट्रेनिंग करते हैं। उनका घर राजस्थान के चूरू जिले में हैं। वो बहुत कम समय अपने परिवार को दे पाते हैं।
वो कहते हैं, “मेरा बेटा नहीं जानता कि उसके पिता कैसे दिखते हैं। वो मुझे नहीं पहचान पाता। मेरी पत्नी ही उसे तस्वीरों में दिखाती है कि उसके पापा कैसे हैं। मगर अब मुझे उनके साथ कुछ समय मिलेगा।”
देवेंद्र अपनी पत्नी और मां को अपनी सफलता का श्रेय देते हैं। उनकी पत्नी एक कबड्डी खिलाड़ी रही हैं, मगर देवेंद्र के करियर के लिए उन्होंने अपना करियर छोड़ दिया। वो कहते हैं कि हाथ गंवाने के बाद सामान्य बच्चे उनके साथ नहीं खेलते थे, इसलिए वो बांस से बने भाले से खेला करते थे। उन्होंने कई साल तक सामान्य श्रेणी के खिलाड़ियों के साथ कंपीट भी किया और उन्हें मात दी।
वो कहते हैं, “मेरा बेटा नहीं जानता कि उसके पिता कैसे दिखते हैं। वो मुझे नहीं पहचान पाता। मेरी पत्नी ही उसे तस्वीरों में दिखाती है कि उसके पापा कैसे हैं। मगर अब मुझे उनके साथ कुछ समय मिलेगा।”
देवेंद्र अपनी पत्नी और मां को अपनी सफलता का श्रेय देते हैं। उनकी पत्नी एक कबड्डी खिलाड़ी रही हैं, मगर देवेंद्र के करियर के लिए उन्होंने अपना करियर छोड़ दिया। वो कहते हैं कि हाथ गंवाने के बाद सामान्य बच्चे उनके साथ नहीं खेलते थे, इसलिए वो बांस से बने भाले से खेला करते थे। उन्होंने कई साल तक सामान्य श्रेणी के खिलाड़ियों के साथ कंपीट भी किया और उन्हें मात दी।