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धाविका प्राजक्ता को पड़े रोटी के लाले, लॉकडाउन के चलते मां हुईं बेरोजगार, पिता हैं लकवाग्रस्त
Thu, 14 May 2020 07:26 AM IST
Rajeev Rai
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: Rajeev Rai
Updated Thu, 14 May 2020 07:26 AM IST
सार
नागपुर की एथलीट ने पिछले साल इटली में हुए विश्व विद्यालय खेलों में किया था देश का प्रतिनिधित्व
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प्राजक्ता गोडबोले
- फोटो : social media
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विस्तार
नागपुर की धाविका प्राजक्ता गोडबोले को रोटी के लाले पड़ गए हैं। उन्हें नहीं पता कि अगले वक्त का खाना मिलेगा या नहीं। लॉकडाउन के कारण उनकी मां बेरोजगार हैं जबकि पिता कुछ समय पहले लकवाग्रस्त हो गए थे। चौबीस वर्षीय प्राजक्ता नागपुर में सिरासपेठ झुग्गी में माता-पिता के साथ रहती हैं। उन्होंने 2019 में इटली में विश्व विद्यालय खेलों की 5000 मीटर रेस में भारतीय विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने 18:23.92 सेकंड का समय निकाला था लेकिन वह फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी थीं।
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साल के शुरू में हुई टाटा स्टील भुवनेश्वर हाफ मैराथन में 1:33.05 सेकंड के समय से दूसरे स्थान पर रही थीं। उनके पिता विलास गोडबोले पहले सुरक्षाकर्मी का काम करते थे, लेकिन वह एक दुर्घटना के बाद लकवाग्रस्त हो गए। प्राजक्ता की मां अरुणा रसोइये के तौर पर काम करके 5000 से 6000 रूपये महीना तक कमाती थीं। इससे उनका घर चलता था। लॉकडाउन की वजह से शादियां नहीं हो रहीं तो उन्हें दो जून का खाना जुटाने के लिए दिक्कत हो रही है।
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लॉकडाउन ने कर दिया बर्बाद:
प्राजक्ता ने कहा,‘हम पास के लोगों की मदद पर ही निर्भर हैं। वे हमें चावल, दाल और अन्य चीजें दे जाते हैं। इसलिए हमारे पास अगले दो-तीन दिन के लिए खाने को कुछ होता है लेकिन नहीं पता कि आगे क्या होगा। हमारे लिए यह लॉकडाउन काफी क्रूरता भरा साबित हो रहा है। मैं ट्रेनिंग के बारे में सोच भी नहीं रही हूं क्योंकि मैं नहीं जानती कि इन हालात में मैं कैसे जीवित रहूंगी। हमारे लिए जीवन बहुत कठिन है। इस लॉकडाउन ने हमें बर्बाद कर दिया है। मैं नहीं जानती कि क्या करूं, मेरे माता-पिता कुछ नहीं कर सकते। हम सिर्फ प्रार्थना ही कर सकते हैं कि यह लॉकडाउन खत्म हो जाए। हम बस इसका इंतजार कर रहे हैं।’
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