बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने डॉक्टरों का वेतन बढ़ाने की लगाई गुहार
अगले माह बुल्गारिया और ईरान में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने जा रहे बॉक्सरों को एनआईएस पटियाला में बिना टीम डॉक्टर के तैयारियां करनी पड़ रही हैं। पुरुष बॉक्सिंग टीम के नियमित डॉक्टर ने कम वेतन का हवाला देकर कैंप में जुडने से इंकार कर दिया है।
खतरों का खेल होने के कारण बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) खेल मंत्रालय और साई से लंबे समय से डॉक्टरों का वेतन बढ़ाने की मांग कर रही है। उसने तर्क दिया है जो वेतन वर्तमान में निर्धारित है उस पर स्तरीय डॉक्टर मिलना संभव नहीं है। यह हाल सिर्फ बॉक्सिंग का नहीं है बल्कि दूसरे खेलों का भी है। कम वेतन के चलते कई खेलों के कैंपों में टीम डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं है।
वर्तमान में नए डॉक्टर का वेतन 50 हजार रुपये और पांच साल का अनुभव रखने वाले डॉक्टर का वेतन एक लाख रुपये प्रति माह निर्धारित है। बीएफआई ने पुरुष, महिला और यूथ बॉक्सरों के कैंप के लिए दो-दो डॉक्टरों की नियुक्त का प्रस्ताव दिया है जिसे वार्षिक कैलेंडर कार्यक्रम (एसीटीसी) में मंजूरी मिली हुई है।
पुरुष बॉक्सरों के लिए डॉ. करनजीत सिंह का नाम प्रस्तावित किया गया था। वह सरकारी कर्मी हैं, लेकिन उन्हें कैंप में एक लाख रुपये का वेतन मिलता है, जबकि सरकारी नौकरी में उनका वेतन कहीं ज्यादा है। उन्होंने इस बार यही शर्त रखी कि जितना वेतन उन्हें सरकार से मिलता है उतना ही कैंप में दिया जाए।
इस पर कोई राय नहीं बनीं तो उन्होंने कैंप ज्वाइन नहीं किया। फिल्हाल बॉक्सरों के साथ एनआईएस हेल्थ सेंटर में तैनात डॉक्टर को जोड़ दिया गया है, लेकिन उनके सिर पर वहां चल रहे एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग के कैंपों का भी भार है। बॉक्सरों ने भी फेडरेशन से नियमित डॉक्टर लगाने की मांग की है।
वेतन बढ़ाने की हो चुकी है घोषणा
यह समस्या नई नहीं है। खेल संघों की मांग को ध्यान में रख मंत्रालय ने बीते वर्ष डॉक्टरों, फीजियोथेरिपस्ट और मेंटल ट्रेनर का वेतन बढ़ाने की बात कही थी, लेकिन इसे आज तक लागू नहीं किया जा सका है।
बीएफआई के कार्यकारी निदेशक आरके सचेती का कहना है कि उन्होंने साई से कहा है कि बॉक्सरों के साथ स्तरीय डॉक्टर हर हाल में चाहिए, लेकिन इस वेतन पर अनुभवी डॉक्टर नहीं मिल सकते हैं, इस लिए इनके वेतन में बढ़ोत्तरी की जाए।
साथ ही यह भी कहा है कि सरकारी डॉक्टरों को अनुबंधित करने पर उन्हें कैंप में उतना ही वेतन दिया जाए जितना सरकार देती है। वहीं, साई ने डॉक्टर, फीजियो के वेतन को लेकर बढ़ते दबाव के चलते वेतनमान में संशोधन के प्रस्ताव को आगे बढ़ाया है।