प्रो रेसलिंग से पहले जार्जिया में ट्रेनिंग करेंगे बजरंग, नहीं रखना चाहते कोई कोर-कसर
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प्रो रेसलिंग लीग का चौथा संस्करण जनवरी में होगा और निगाहें भारत के स्टार पहलवान बजरंग पूनिया पर होंगी। बजरंग ने इस साल राष्ट्रमंडल, एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने के अलावा विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। इस बार अपने 65 भारवर्ग में दुनिया का नंबर एक पहलवान होने के नाते उन पर उम्मीदों का दबाव भी ज्यादा है। हालांकि खुद बजरंग इस बात से इनकार करते हैं कि लेकिन अगले महीने होने वाली प्रो रेसलिंग से पहले जार्जिया ट्रेनिंग के लिए जा रहे हैं।
उनका कहना है कि प्रो रेसलिंग लीग का स्तर काफी ऊंचा है और इसमें दुनिया के नामी गिरामी पहलवान हिस्सा ले रहे हैं। उनके भारवर्ग की विश्व रैंकिंग में क्यूबा के एलेक्जेंड्रो एनरिक दूसरे, रूस के अकहमद चेकेइव तीसरे और नए विश्व चैंपियन जापान के ताकुतो ओतोगुरो चौथे स्थान पर हैं।
बुडापेस्ट में हुई विश्व चैंपियनशिप में बजरंग को ताकुतो से मात खानी पड़ी थी। बजरंग का कहना है कि प्रो रेसलिंग की तैयारियों में वह कोई कोर-कसर नहीं रखना चाहते। विश्व चैंपियनशिप से पहले भी 24 वर्षीय बजरंग ने बेलारूस के मिंस्क में ट्रेनिंग की थी। उनका कहना है कि मौसम ठंडा होने के कारण वहां बेहतर तैयारियां हो पाती हैं। अभ्यास के लिए जोड़ीदार भी अच्छे मिल जाते हैं।
जापान के ताकुतो से करेंगे हिसाब बराबर
एक सवाल के जवाब में बजरंग ने कहा कि विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में उनके प्रतिद्वंद्वी 19 वर्षीय ताकुतो की कोई वीडियो फुटेज उपलब्ध नहीं थी और दोनों के सेमीफाइनल मुकाबले एक ही समय दो अलग-अलग मैट पर चल रहे थे। इसलिए वे इस युवा जापानी पहलवान की काट नहीं ढूंढ सके थे लेकिन इस बार किसी भी मंच पर सामना होगा तो वह हिसाब बराबर कर देंगे। क्यूबा के एलेक्जेंड्रो को तो वह विश्व चैंपियनशिप में हरा ही चुके हैं। हालांकि अभी यह तय होना बाकी है कि इस बार प्रो रेसलिंग में कौन से प्रमुख विदेशी पहलवान भाग लेंगे।
योगी भाई के फीतले दांव की काट नहीं
बजरंग का कहना है उनका कोई खास दांव नहीं है जो चल जाए वो ही दांव सही है। अलबत्ता वह यह जरूर कहते हैं कि वह योगी भाई (मेंटर और गुरु योगेश्वर दत्त)के फीतले दांव की कोई काट नहीं है लेकिन उनकी तरह पारंगत होना आसान नहीं है। अलबत्ता वह अभ्यास और कोशिश तो करते ही रहते हैं।
ग्रेडिंग प्रणाली से मिलेगी प्रेरणा: इस सीजन में पांच पदक जीतने वाले पूनिया इस बात को लेकर बेहद खुश हैं कि क्रिकेट के बाद कुश्ती में भी ग्रेडिंग शुरू हो गई है और एक ही ग्रेड में शामिल महिला और पुरुष पहलवानों को एकसमान राशि है।
अब ओलंपिक पदक की हसरत : बजरंग के खाते में विश्व चैंपियनशिप, राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल के एक नहीं दो-दो पदक हैं। उनका कहना है उनकी ट्रॉफियों की अलमारी में बस एक ओलंपिक पदक की कमी है जो उनका बड़ा ख्वाब है। मेहनत रंग लाई तो इस बार 2020 टोक्यो में वह हसरत भी पूरी हो जाएगी।