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अटल बिहारी वाजपेयी को मिली सबसे बड़ी श्रद्धांजलि, बजरंग पूनिया ने समर्पित किया गोल्ड मेडल
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 20 Aug 2018 12:32 AM IST
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18वें एशियाई खेलों में 65 किलो फ्रीस्टाइल कुश्ती में पीला तमगा जीतकर भारत को पहला स्वर्ण दिलाने वाले बजरंग पूनिया ने अपना पदक दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित किया।
वाजपेयी का लंबी बीमारी के बाद 16 अगस्त को निधन हो गया था। पूनिया ने कहा, 'मैं यह स्वर्ण पदक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित करता हूं जिनका हाल ही में निधन हुआ है।'
उन्होंने इस पदक का श्रेय अपने मेंटर योगेश्वर दत्त को भी दिया जिन्होंने 2014 में यह कारनामा किया था। उन्होंने कहा, 'योगी भाई ने मुझसे कहा कि मैने 2014 में यह किया था और अब तुम्हे करना है। जब उन्होंने जीता था तब उससे पहले के पदक में और उनके पदक में काफी साल का अंतर था। मैं जीत की परंपरा कायम रखना चाहता था।'
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उन्होंने जीत के बाद कहा, 'यह मेरे लिए सबसे बड़ा पदक है। यहां जीतने पर आप टोक्यो ओलंपिक के दावेदार बन जाते हैं। मेरी नजरें ओलंपिक पर है और मैं उसी की तैयारी कर रहा हूं। मैं विश्व चैम्पियनशिप में भी इस प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करूंगा।'
उन्होंने कहा, 'एशियाड में भारत ने कुश्ती में ज्यादा स्वर्ण नहीं जीते हैं । यह मेरे लिये बड़ी उपलब्धि है। योगेश्वर और राजिंदर सिंह के बाद एक साल में दो स्वर्ण (राष्ट्रमंडल और एशियाड) जीतने वाला मैं तीसरा पहलवान हूं और मुझे इस पर गर्व है।'
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वाजपेयी का लंबी बीमारी के बाद 16 अगस्त को निधन हो गया था। पूनिया ने कहा, 'मैं यह स्वर्ण पदक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित करता हूं जिनका हाल ही में निधन हुआ है।'
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उन्होंने इस पदक का श्रेय अपने मेंटर योगेश्वर दत्त को भी दिया जिन्होंने 2014 में यह कारनामा किया था। उन्होंने कहा, 'योगी भाई ने मुझसे कहा कि मैने 2014 में यह किया था और अब तुम्हे करना है। जब उन्होंने जीता था तब उससे पहले के पदक में और उनके पदक में काफी साल का अंतर था। मैं जीत की परंपरा कायम रखना चाहता था।'
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उन्होंने जीत के बाद कहा, 'यह मेरे लिए सबसे बड़ा पदक है। यहां जीतने पर आप टोक्यो ओलंपिक के दावेदार बन जाते हैं। मेरी नजरें ओलंपिक पर है और मैं उसी की तैयारी कर रहा हूं। मैं विश्व चैम्पियनशिप में भी इस प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करूंगा।'
उन्होंने कहा, 'एशियाड में भारत ने कुश्ती में ज्यादा स्वर्ण नहीं जीते हैं । यह मेरे लिये बड़ी उपलब्धि है। योगेश्वर और राजिंदर सिंह के बाद एक साल में दो स्वर्ण (राष्ट्रमंडल और एशियाड) जीतने वाला मैं तीसरा पहलवान हूं और मुझे इस पर गर्व है।'