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तैरने के लिए पूल नहीं है, बांध में तैर कर मेडल लाने का है सपना

Wed, 17 Aug 2016 01:40 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 17 Aug 2016 01:40 AM IST
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Aspiring Swimmers Preparing In A Dam For 2020 Olympics
2016 के रियो ओलंपिक में भारत का अब तक का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। तमाम कोशिशों, प्रार्थनाओं और इरादों के बावजूद भारत के कई बड़े नाम खाली हाथ ही ओलंपिक से बाहर हो गए। मगर इस ओलंपिक से कई खिलाड़यों ने काफी कुछ सीखा होगा।
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इसी तर्ज पर भारत की के युवा तैराक, जिनमें एक नाम रेखा कुमारी का भी है, उन्होंने 2020 के टोक्यो ओलंपिक के लिए तैयारियां शुरु कर दी हैं। मगर इससे भी बड़ी बात है कि इन्होंने अपनी तैयारियां एक बांध में शुरू की हैं।
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रांची के पास एक गांव में रहने वाली रेखा के आस-पास कोई स्विमिंग पूल नहीं है। इसलिए गांव और आसपास के युवा तैराक रांची शहर से 10 किलोमीटर दूर एक बांध में प्रैक्टिस करते हैं।
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किसी को नहीं पता क्यों बंद पड़ा है वर्ल्ड क्लास पूल

Aspiring Swimmers Preparing In A Dam For 2020 Olympics
रियो ओलंपिक में भारत के कई खिलाड़ी चौथे स्थान पर रहे। अभिनव बिंद्रा, दीपा करमाकर और सानिया-बोपन्ना चौथे स्थान पर रहे। इस बात से दुखी होने के बजाय रेखा ने इससे प्रेरणा लेकर अगले ओलंपिक का तैयारी शुरू कर दी।

इनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। स्विमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के साथ एक फाउंडेशन के साथ युवा तैराक तलाश रहे देश के इन बच्चों के पास प्रतिभा तो है, मगर आर्थिक तंगी के कारण ये बड़े मंच तक नहीं पहुंच पाते। इनके पास तैरने के लिए पूल भी नहीं हैं।

2011 में रांची में राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए एक भव्य स्टेडियम का निर्माण किया गया था। इस स्टेडियम में ओलंपिक साइज के पूल भी हैं मगर पिछले दो सालों से इस पूल पर ताले लगे हैं। पूल बंद होने की वजह किसी अधिकारी के पास नहीं हैं।

सपनो को बचाने की है कोशिश, मदद की है उम्मीद

Aspiring Swimmers Preparing In A Dam For 2020 Olympics
asdasd - फोटो : asdas
2012 में इस पूल को कई तैराकों के लिए खोला गया, मगर दो महीनों में ही इसे बंद कर दिया गया।

बांध पर बच्चों को स्विमिंग सीखाने वाले उमेश कुमार को उम्मीद है कि सरकार जल्दी ही उनकी मदद करेगी। उमेश इन बच्चों के ओलंपिक सपनों को डूबने से बचाने की कोशिश कर रहें हैं।

रेखा कहती है कि उन्हें डर लगता है, मगर सपना पूरा करने के लिए उन्हें यह करना है। वो ओलंपिक मेडल जीतना चाहती हैं। झारखंड तैराकी संघ ने राज्य सरकार से कई बार पत्र लिखकर पूल न खुलने का कारण भी पूछा मगर उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।
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