{"_id":"5b7af0a442c79246344b2254","slug":"asian-games-2018-shooter-deepak-kumar-and-lakshya-bags-silver-in-shooting","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारतीय शूटर्स ने दूसरे दिन दिलाए 2 सिल्वर, एक किसान का बेटा तो दूसरा संस्कृत का मास्टर","category":{"title":"Other Sports","title_hn":"अन्य खेल","slug":"other-sports"}}
भारतीय शूटर्स ने दूसरे दिन दिलाए 2 सिल्वर, एक किसान का बेटा तो दूसरा संस्कृत का मास्टर
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 20 Aug 2018 10:17 PM IST
विज्ञापन
निशानेबाज दीपक कुमार और लक्ष्य शेरॉन ने सोमवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए 18वें एशियाई खेलों की अपनी स्पर्धाओं में रजत पदक अपने नाम किए। 33 वर्षीय दीपक को हालांकि पुरूषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में इस बड़े पदक के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, उन्होंने 14 साल पहले निशानेबाजी शुरू की थी।
वहीं लक्ष्य ने चार साल पहले इस खेल में प्रवेश किया था और अब 20 साल की उम्र में वह एशियाड में पुरूष ट्रैप में रजत पदकधारी बन गए, इस तरह उन्होंने पूर्व विश्व चैम्पियन मानवजीत सिंह संधू की 2006 दोहा चरण की उपलब्धि की बराबरी की।
अनुभवी संधू भी आज ट्रैप स्पर्धा में थे और पदक की दौड़ में बने हुए थे लेकिन अंत में वह पांच लक्ष्य चूक गए और चौथे स्थान पर रहे। लक्ष्य के पिता सोमवीर पूर्व राष्ट्रीय चैम्पियन पहलवान हैं और जैसे ही स्पर्धा खत्म हुई वह संधू के पैर छूने गए।
विज्ञापन
ट्रैप फाइनल में चीनी ताइपे के कुन्पी यांग ने जीत दर्ज की जिन्होंने 48 निशाने लगाए जिससे उन्होंने विश्व रिकार्ड की बराबरी भी की। लक्ष्य ने 43 और दक्षिण कोरिया के दाएमयियोंग अहन ने 30 अंक से कांस्य पदक जीता।
हरियाणा के जींद के इस निशानेबाज ने कहा, 'बचपन से ही मुझे बंदूक और राइफल पसंद थी। मैं अपने पिता के साथ इसमें हाथ आजमाता था। लेकिन जब मैंने गंभीरता से निशानेबाजी में आने का फैसला किया तो उन्हें मुझ पर इतना भरोसा नहीं था। लेकिन अब मुझे पूरा भरोसा है कि उन्हें मुझ पर गर्व होगा।'
शॉटगन कोच मनशेर सिंह ने कहा कि लक्ष्य जूनियर कार्यक्रम में शामिल था लेकिन जल्द ही उसने सीनियर टीम में जगह बना ली। लेकिन उन्हें डर था कि कहीं वह इस बड़े टूर्नामेंट का दबाव महसूस नहीं करे तो उन्होंने खेल गांव में उसे सबसे दूर ही रखा और लक्ष्य अपने कमरे में ही रहते थे। अंत में हालांकि उनके लिए यह शानदार रहा।
एक अन्य रजत पदक सुबह के सत्र में आया जब दीपक कुमार ने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में पदक जीता। यह उनके करियर का सबसे बड़ा पदक है लेकिन उन्होंने अपनी भावनाओं को नियंत्रित रखा, जो शायद देहरादून में गुरूकल में रहने से हुआ है।
चीन के गत चैम्पियन यांग हाओरान ने 249.1 के कुल योग से स्वर्ण पदक जीता। दीपक 18वें शॉट तक पदक की दौड़ में नहीं थे लेकिन इसके बाद उन्होंने 10.9 अंक का परफेक्ट स्कोर बनाया। उनका कुल स्कोर 247.7 रहा जिससे उन्होंने ताइपे के लु शाओचुआन को पछाड़ दिया जिन्होंने 226.8 अंक से कांस्य पदक जीता।
कल अपूर्वी चंदेला के साथ मिश्रित टीम का कांस्य पदक जीतने वाले रवि कुमार दुर्भाग्यशाली रहे। वह पदक से चूक गये और चौथे स्थान पर रहे। वह 20वें शाट के बाद बाहर हो गए और उनका स्कोर 205 . 2 रहा।
दीपक के माता पिता ने उन्हें देहरादून में गुरूकुल अकादमी भेजा था। वह धाराप्रवाह संस्कृत बोलते हैं और गुरूकुल से मिली शिक्षा को फैलाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं जो भी हूं, वो गुरूकुल की वजह से हूं। इसमें मुझे जीवन के असली महत्व का पता चला। मेरे मात पिता ने मुझे दिल्ली से दूर रखा क्योंकि वे शहर के माहौल से मुझे दूर रखना चाहते थे।'
विज्ञापन
वहीं लक्ष्य ने चार साल पहले इस खेल में प्रवेश किया था और अब 20 साल की उम्र में वह एशियाड में पुरूष ट्रैप में रजत पदकधारी बन गए, इस तरह उन्होंने पूर्व विश्व चैम्पियन मानवजीत सिंह संधू की 2006 दोहा चरण की उपलब्धि की बराबरी की।
विज्ञापन
अनुभवी संधू भी आज ट्रैप स्पर्धा में थे और पदक की दौड़ में बने हुए थे लेकिन अंत में वह पांच लक्ष्य चूक गए और चौथे स्थान पर रहे। लक्ष्य के पिता सोमवीर पूर्व राष्ट्रीय चैम्पियन पहलवान हैं और जैसे ही स्पर्धा खत्म हुई वह संधू के पैर छूने गए।
विज्ञापन
ट्रैप फाइनल में चीनी ताइपे के कुन्पी यांग ने जीत दर्ज की जिन्होंने 48 निशाने लगाए जिससे उन्होंने विश्व रिकार्ड की बराबरी भी की। लक्ष्य ने 43 और दक्षिण कोरिया के दाएमयियोंग अहन ने 30 अंक से कांस्य पदक जीता।
हरियाणा के जींद के इस निशानेबाज ने कहा, 'बचपन से ही मुझे बंदूक और राइफल पसंद थी। मैं अपने पिता के साथ इसमें हाथ आजमाता था। लेकिन जब मैंने गंभीरता से निशानेबाजी में आने का फैसला किया तो उन्हें मुझ पर इतना भरोसा नहीं था। लेकिन अब मुझे पूरा भरोसा है कि उन्हें मुझ पर गर्व होगा।'
शॉटगन कोच मनशेर सिंह ने कहा कि लक्ष्य जूनियर कार्यक्रम में शामिल था लेकिन जल्द ही उसने सीनियर टीम में जगह बना ली। लेकिन उन्हें डर था कि कहीं वह इस बड़े टूर्नामेंट का दबाव महसूस नहीं करे तो उन्होंने खेल गांव में उसे सबसे दूर ही रखा और लक्ष्य अपने कमरे में ही रहते थे। अंत में हालांकि उनके लिए यह शानदार रहा।
एक अन्य रजत पदक सुबह के सत्र में आया जब दीपक कुमार ने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में पदक जीता। यह उनके करियर का सबसे बड़ा पदक है लेकिन उन्होंने अपनी भावनाओं को नियंत्रित रखा, जो शायद देहरादून में गुरूकल में रहने से हुआ है।
चीन के गत चैम्पियन यांग हाओरान ने 249.1 के कुल योग से स्वर्ण पदक जीता। दीपक 18वें शॉट तक पदक की दौड़ में नहीं थे लेकिन इसके बाद उन्होंने 10.9 अंक का परफेक्ट स्कोर बनाया। उनका कुल स्कोर 247.7 रहा जिससे उन्होंने ताइपे के लु शाओचुआन को पछाड़ दिया जिन्होंने 226.8 अंक से कांस्य पदक जीता।
कल अपूर्वी चंदेला के साथ मिश्रित टीम का कांस्य पदक जीतने वाले रवि कुमार दुर्भाग्यशाली रहे। वह पदक से चूक गये और चौथे स्थान पर रहे। वह 20वें शाट के बाद बाहर हो गए और उनका स्कोर 205 . 2 रहा।
दीपक के माता पिता ने उन्हें देहरादून में गुरूकुल अकादमी भेजा था। वह धाराप्रवाह संस्कृत बोलते हैं और गुरूकुल से मिली शिक्षा को फैलाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं जो भी हूं, वो गुरूकुल की वजह से हूं। इसमें मुझे जीवन के असली महत्व का पता चला। मेरे मात पिता ने मुझे दिल्ली से दूर रखा क्योंकि वे शहर के माहौल से मुझे दूर रखना चाहते थे।'