एशियन गेम्स में मालिश वाला नहीं मिलने पर परेशान भारतीय तीरंदाज, जानें क्या है पूरा मामला
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खेल मंत्रालय-इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के बीच कोच और सपोर्टिंग स्टाफ को लेकर हुई खींचतान का खामियाजा एशियाई खेलों के लिए जकार्ता आई तीरंदाजी टीम को भुगतना पड़ रहा है। रीकर्व और कंपाउंड में पदक के दावेदार भारतीय तीरंदाजों के पास न तो महिला मेस्यूज है (मालिश करने वाली) और न ही अतिरिक्त रीकर्व कोच को भेजा गया।
हाल यह है कि तैयारियों का दौरान यहां तीरंदाज परेशान हैं और दीपिका कुमारी तो बीमारी से उठकर यहां आई हैं। टीम ने मांग की है कि अगर मेस्यूज को नहीं भेजा जा सकता है तो कम से कम पहले से मंजूर मैस्योर (पुरुषों की मालिश करने वाला) को ही यहां भेज दिया जाए।
जकार्ता के लिए दीपिका के कोच धर्मेंद्र तिवारी और मैस्योर अश्वनी यादव का नाम भेजा गया था। जिसे आईओए ने मंजूर कर लिया। महिला तीरंदाज लंबे समय मांग करती आ रही हैं कि उनके साथ मेस्यूज होना चाहिए। तीरंदाजी के बाद मालिश से फिट रहने में काफी फर्क पड़ता है।
इसके बाद अश्वनी का नाम काटकर मेस्यूज रूमा कार का नाम मंत्रालय ने डाल दिया। यही नहीं धर्मेंद्र तिवारी की जगह एससी रॉय का नाम डाला गयाए लेकिन आईओए ने दोनों का ही नाम मंजूर नहीं किया। आईओए का तर्क है कि इन दोनों के मान्यता कार्ड नहीं बन पाए हैं, जिसके चलते दोनों ही यहां नहीं आ पाए हैं।
महिला तीरंदाजों ने जकार्ता में अमर उजाला से खुलासा किया कि यहां उमस भरी गर्मी है। ऐसे में प्रैक्टिस के बाद मेस्यूज होने का काफी फायदा होता, लेकिन यहां कोई नहीं आया है। वहीं टीम के पुरुष तीरंदाजों का कहना है कि अगर मेस्यूज नहीं आनी थी तो मैस्योर का नाम क्यों हटाया गया कम से कम उन्हें तो उसका फायदा मिलता। अब दोनों को ही इनका फायदा नहीं मिल रहा है।
रीकर्व के साथ कंपाउंड कोच खड़ा करने की तैयारी
कोच एससी रॉय के नहीं आने पर कंपटीशन के दौरान रीकर्व तीरंदाजों के पीछे कंपाउंड कोच को खड़ा करने की तैयारी की जा रही है। कंपटीशन के दौरान तीरंदाज के पीछे कोच खड़ा होता है। दिक्कत न हो इस लिए टीम के साथ दो कोच भेजे जाते हैं, लेकिन यहां रीकर्व तीरंदाजों के पास महज सवाइयां माझी हैं, जबकि जीवनजोत सिंह और रिछपाल कंपाउंड तीरंदाजों के साथ हैं।