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AIU vs WUG: एआईयू ने डब्ल्यूयूजी विवाद के लिए संयुक्त सचिव सेखों को निलंबित किया, खिलाड़ियों के पदक पक्के किए
Wed, 23 Jul 2025 12:56 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 23 Jul 2025 12:56 PM IST
सार
एआईयू ने हालांकि कहा कि एफआईएसयू (विश्वविद्यालय खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्था) के साथ बातचीत के बाद, टीम के सभी 12 सदस्यों को पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं, जैसा कि नियम है।
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- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) ने अपने संयुक्त सचिव बलजीत सिंह सेखों को निलंबित कर दिया है और जर्मनी के राइन-रूहर में चल रहे विश्व विश्वविद्यालय खेलों (डब्ल्यूयूजी) के लिए चुने गए खिलाड़ियों के प्रतियोगिता में भाग लेने से चूकने के कुप्रबंधन की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच पैनल का गठन किया है।
भारतीय बैडमिंटन टीम ने इस प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था लेकिन उस समय विवाद पैदा हो गया जब यह बात सामने आई कि 16 जुलाई को टीम मैनेजरों की बैठक के दौरान भारतीय अधिकारियों द्वारा सभी नामों को सही ढंग से प्रस्तुत न कर पाने के कारण चुने गए 12 खिलाड़ियों में से छह को भाग लेने से रोक दिया गया था।
एआईयू ने हालांकि कहा कि एफआईएसयू (विश्वविद्यालय खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्था) के साथ बातचीत के बाद, टीम के सभी 12 सदस्यों को पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं, जैसा कि नियम है। रोहन कुमार, दर्शन पुजारी, अदिति भट्ट, अभिनाश मोहंती, विराज कुवले और अलीशा खान भारत की 12 सदस्यीय टीम का हिस्सा थे लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला।
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महिलाओं की 400 मीटर दौड़ की धाविका देवयानी बाजाला ने भी आरोप लगाया कि अधिकारियों की गलती के कारण वह भी प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाई। एआईयू के महासचिव पंकज मित्तल ने कहा, 'जांच पैनल पूरे मामले की जांच करेगा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए हमने अपने संयुक्त सचिव बलजीत सिंह सेखों को निलंबित करने का फैसला किया है। पैनल 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।'
मित्तल ने कहा, 'इसके अलावा, एआईयू ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जो खिलाड़ी मैनेजर की गलती के कारण प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाए थे उन्हें एफआईएसयू द्वारा प्रमाण पत्र और पदक दिए गए हैं। यह एफआईएसयू के साथ हमारी बातचीत के बाद ही संभव हो पाया।' सेखों उस भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख थे जो इस समय जर्मनी में है और 27 जुलाई को समाप्त होने वाले खेलों के लिए अधिकारियों और खिलाड़ियों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए जिम्मेदार थे। जांच समिति की अध्यक्षता बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के कुलपति अनिल कुमार कलकल करेंगे। इससे पहले, खेल मंत्रालय ने भी इस घटनाक्रम पर संज्ञान लिया था।
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भारतीय बैडमिंटन टीम ने इस प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था लेकिन उस समय विवाद पैदा हो गया जब यह बात सामने आई कि 16 जुलाई को टीम मैनेजरों की बैठक के दौरान भारतीय अधिकारियों द्वारा सभी नामों को सही ढंग से प्रस्तुत न कर पाने के कारण चुने गए 12 खिलाड़ियों में से छह को भाग लेने से रोक दिया गया था।
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एआईयू ने हालांकि कहा कि एफआईएसयू (विश्वविद्यालय खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्था) के साथ बातचीत के बाद, टीम के सभी 12 सदस्यों को पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं, जैसा कि नियम है। रोहन कुमार, दर्शन पुजारी, अदिति भट्ट, अभिनाश मोहंती, विराज कुवले और अलीशा खान भारत की 12 सदस्यीय टीम का हिस्सा थे लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला।
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महिलाओं की 400 मीटर दौड़ की धाविका देवयानी बाजाला ने भी आरोप लगाया कि अधिकारियों की गलती के कारण वह भी प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाई। एआईयू के महासचिव पंकज मित्तल ने कहा, 'जांच पैनल पूरे मामले की जांच करेगा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए हमने अपने संयुक्त सचिव बलजीत सिंह सेखों को निलंबित करने का फैसला किया है। पैनल 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।'
मित्तल ने कहा, 'इसके अलावा, एआईयू ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जो खिलाड़ी मैनेजर की गलती के कारण प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाए थे उन्हें एफआईएसयू द्वारा प्रमाण पत्र और पदक दिए गए हैं। यह एफआईएसयू के साथ हमारी बातचीत के बाद ही संभव हो पाया।' सेखों उस भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख थे जो इस समय जर्मनी में है और 27 जुलाई को समाप्त होने वाले खेलों के लिए अधिकारियों और खिलाड़ियों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए जिम्मेदार थे। जांच समिति की अध्यक्षता बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के कुलपति अनिल कुमार कलकल करेंगे। इससे पहले, खेल मंत्रालय ने भी इस घटनाक्रम पर संज्ञान लिया था।