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मेरी बायोपिक के लिए आमिर खान हैं बेस्ट: आनंद
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 29 Jun 2016 04:53 PM IST
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आमिर खान
- फोटो : YouTube
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पाँच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद को आईआईटी कानपुर ने मंगलवार को डॉक्टरेट की मानद उपाधी से सम्मानित किया। उन्हें यह सम्मान आईआईटी के 49वें दीक्षांत समारोह के दौरान मिला।
46 साल के आनंद को यह सम्मान नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरिंवद पनगढ़िया ने प्रदान किया। डिग्री लेते समय आनंद ने 1985 का वो दिन याद किया जब उन्हें राष्ट्रपति भवन में अर्जुन पुरुस्कार मिला था।
विश्वनाथन आनंद ने कहा अगर कोई फिल्ममेकर उनकी बायोपिक के लिए उनसे संपर्क करेगा तो देखा जाएगा। फिलहाल ऐसा कोई प्रपोजल नहीं है। अपनी निजी राय बताते हुए उन्होंने इस रोल के लिए आमिर खान को सबसे फिट एक्टर बताया और कहा कि वो हर रोल में खुद को ढाल लेते हैं। आमिर खुद चेस खेलते भी हैं। वैसे आमिर आनंद के साथ चेस खेल चुके है। इस मैच को आनंद ने सिर्फ 10 मिनट में जीत लिया था।
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46 साल के आनंद को यह सम्मान नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरिंवद पनगढ़िया ने प्रदान किया। डिग्री लेते समय आनंद ने 1985 का वो दिन याद किया जब उन्हें राष्ट्रपति भवन में अर्जुन पुरुस्कार मिला था।
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विश्वनाथन आनंद ने कहा अगर कोई फिल्ममेकर उनकी बायोपिक के लिए उनसे संपर्क करेगा तो देखा जाएगा। फिलहाल ऐसा कोई प्रपोजल नहीं है। अपनी निजी राय बताते हुए उन्होंने इस रोल के लिए आमिर खान को सबसे फिट एक्टर बताया और कहा कि वो हर रोल में खुद को ढाल लेते हैं। आमिर खुद चेस खेलते भी हैं। वैसे आमिर आनंद के साथ चेस खेल चुके है। इस मैच को आनंद ने सिर्फ 10 मिनट में जीत लिया था।
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इस बार हम जीतेंगे ज़्यादा मेडल
विश्वनाथन आनंद
- फोटो : YouTube
आनंद ने अगले महीने होने वाले रियो ओलिंपिक्स में भारत की संभावनाओं के बारे में बात करते हुए कहा कि वहां भारत को इस बार पहले से ज्यादा मेडल मिलेंगे। भविष्य में ओलिंपिक्स में बढ़िया करने के लिए उन्होंने सेटअप में बदलाव की बात कही। उनके मुताबिक, बदलाव सिर्फ ओलिंपिक्स को देख कर नहीं, हमारा बल्कि लॉन्ग टर्म प्रॉजेक्ट होना चाहिए।
इस मौके पर आनंद ने कहा, “1987 में पहला भारतीय ग्रैंड मास्टर बनने के बाद भी में सीखता रहा और विश्व चैंपियन बनना मेरा अगला लक्ष्य था। इसी तरह आप लोग भी आज ग्रेजुएट हो रहें हैं, मगर आपको भी अपना अलगा लक्ष्य मालूम होना चाहिए। आप आज जो भी सीखते हैं, वो कभी न कभी आपके काम जरूर आता है।”
इस मौके पर आनंद ने कहा, “1987 में पहला भारतीय ग्रैंड मास्टर बनने के बाद भी में सीखता रहा और विश्व चैंपियन बनना मेरा अगला लक्ष्य था। इसी तरह आप लोग भी आज ग्रेजुएट हो रहें हैं, मगर आपको भी अपना अलगा लक्ष्य मालूम होना चाहिए। आप आज जो भी सीखते हैं, वो कभी न कभी आपके काम जरूर आता है।”