कोच-तीरंदाज घूमते रहे, मेडल ले गया इटली
देश के खेलों के इतिहास में शायद इस तरह की शर्मनाक घटना पहले कभी नहीं घटी होगी।
गुआंगझू (कोरिया) में वर्ल्ड यूनिवर्सियाड में खेलने गए तीरंदाज हैरतअंगेज तरीके से इटली के खिलाफ कांस्य पदक मुकाबला खेलने ही नहीं पहुंचे। मंगलवार को तीरंदाज अपने कोच और मैनेजर समेत इधर-उधर घूमते रहे, जबकि मैदान पर इटली के तीरंदाज उनसे दो-दो हाथ करने का इंतजार करते रहे।
आयोजकों ने भारतीय टीम को एक नहीं कई बार बुलाया, जब टीम मुकाबले के लिए नहीं उतरी तो इटली को विजेता घोषित कर दिया गया। यह शर्मसार करने वाली घटना तब घटी है जब टीम के साथ भारतीय कंपाउंड टीम के चीफ कोच जीवनजोत सिंह के अलावा भारतीय टीम के कोरियाई विदेशी कोच लिम चू वांग मौजूद थे।
क्या है माजरा
स्थानीय समय 10 बजे सुबह पुरुष कंपाउंड तीरंदाजों का कांस्य पदक मुकाबला निर्धारित था। अमूमन मुकाबले से डेढ़ से दो घंटे पहले टीमें स्टेडियम पहुंच जाती हैं, लेकिन भारतीय टीम काफी बाद स्टेडियम पहुंची।
तब तक इटली को कांस्य पदक जा चुका था। मुकाबला छोड़ने वाले कंवलजीत सिंह इस माह डेनमार्क में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप टीम के भी सदस्य हैं। इस चैंपियनशिप में जाने वाली टीम के चीफ कोच कोई और नहीं जीवनजोत सिंह ही हैं। इन खेलों में पंजाब यूनिवर्सिटी पटियाला की टीम में खेलने गई है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि घटना के लिए टीम मैनेजमेंट उपकरणों का फेल होना कारण बता रहा है। फेडरेशन के गले के नीचे यह तर्क नहीं उतर रहा है। उपकरण खराब होने की स्थिति में आयोजनकर्ताओं से उपकरणों की व्यवस्था कराई जा सकती थी।
कोच - मैनेजर की भूमिका पर उठे सवाल
इस घटना के बाद आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के होश उड़े हुए हैं। फेडरेशन पहले ही विदेशी कोच लिम को उनकी बिना अनुमति के इन खेलों में ले जाने पर नाराज बैठी है।
दूसरी ओर इस घटना ने दोनों कोच और टीम मैनेजर की कारगुजारी पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि घटना के पीछे कोच और मैनेजर की लापरवाही है।
मुकाबले का कार्यक्रम बदलने पर इसकी जानकारी तीन से चार दिन पहले मैनेजर्स मीटिंग में दी जाती है। अगर कार्यक्रम बदला गया होगा तो मीटिंग में मैनेजर या कोच मौजूद नहीं रहा होगा।