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जब 11 नहीं 12 खिलाड़ियों के साथ मैदान पर उतरी भारतीय टीम
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 18 Jan 2014 10:10 AM IST
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भारतीय टीम ने लंबे इंतजारी के बाद वर्ल्ड नंबर टीम जर्मनी को हरा दिया है। हालांकि इस मैच में भारत एक समय 11 नहीं 12 खिलाड़ियों के साथ मैदान पर उतरा था।
यह वह जीत है जिसका इंतजार भारतीय हॉकी टीम एक अरसे से कर रही थी। भारतीय टीम के साथ रिक चार्ल्सवर्थ, होसे ब्रासा, माइकल नॉब्स जैसे दिग्गज कोच जुड़े लेकिन ओलंपिक चैंपियन जर्मनी को हराने का सौभाग्य उनके हिस्से में नहीं आया।
वहीं आस्ट्रेलियाई कोच टेरी वॉल्श ने यह कारनामा टीम के साथ अपने पहले टूर्नामेंट में ही कर दिखाया। जी हां, वर्ल्ड हॉकी लीग फाइनल्स में भारत ने वर्ल्ड नंबर वन जर्मनी को 5-4 से परास्त कर दिया।
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मंदीप ने दागे तीन गोल
पहले मैन ऑफ द मैच मंदीप सिंह के तीन गोल और उसके बाद अंतिम मिनट में रूपिंदर पाल सिंह की ड्रैग फ्लिक से निकले गोल ने भारत को यह अप्रत्याशित जीत दिलाई।
वैसे तो लीग मुकाबले में भी भारत ने जर्मनी को चौंकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन मुकाबला 3-3 की बराबरी पर छूटा। आज जर्मनी बदली हुई लगी पहले छह मिनट में कप्तान ओलिवर कॉर्न (चौथे) और स्ट्रालकोवस्की ने गोल कर भारतीयों को बैकफुट पर ला दिया।
18वें मिनट में रघुनाथ की फ्री हिट पर डी के अंदर मंदीप सिंह ने गेंद को गोल की दिशा दी। नौ मिनट बाद ही जर्मनी ने वेस बेंजामिन के गोल की बदौलत बढ़त 3-1 कर ली। हॉफ टाइम तक यही स्कोर था।
रोमांचक हॉकी दूसरे हॉफ में देखने को मिली। 39वें मिनट में भारत को पहला पेनाल्टी कार्नर मिला जिसे रूपिंदर ने गोल में बदल दिया। अगले दोनों गोल भी मंदीप ने किए। लेकिन यह हमले एसवी सुनील ने बनाए।
पहले 41वें और उसके बाद 53वें मिनट में सुनील से मिले पासों को मंदीप ने गोल में पहुंचाया। हालांकि 49वें मिनट में जर्मनी को पेनाल्टी स्ट्रोक मिला लेकिन हाउके ने उसे बाहर फेंक दिया। 55वें मिनट में रघुनाथ को गोल से बाहर जल्द बाहर निकलने पर बाहर कर दिया गया।
आज बेल्जियम से होगा मुकाबला
मार्टिन हैनर ने इसका फायदा उठा 4-4 की बराबरी दिला दी। खेल खत्म होने में 35 सेकेंड रह गए थे। भारत को पेनाल्टी कार्नर मिल गया। कार्नर लेने में पूरे 70 मिनट खत्म हो गए। अब गोल हुआ तो भारत को जीतना था। रूपिंदर ने यही किया और भारत को जर्मनी पर एफआईएच के किसी आधिकारिक रैंकिंग टूर्नामेंट में 10 साल बाद जीत दिलाई।
लाहौर में हुई 2004 की चैंपियंस ट्रॉफी में भारत जर्मनी से जीता था। अब भारत शनिवार को पांचवें-छठे स्थान के लिए बेल्जियम से खेलेगा। जिसने न्यूजीलैंड को पेनाल्टी शूटआउट में 3-1 से हराया।
जब 12 खिलाड़ियों से खेला भारत
मैच में एक मौका ऐसा भी आया जब भारतीय टीम के 12 खिलाड़ी मैदान पर पहुंच गए। जबकि जर्मनी उस वक्त 10 खिलाड़ियों से खेल रही थी। मुकाबला उस वक्त 4-4 से बेहद रोमांचक मोड़ पर खड़ा था। हालांकि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चली।
ऑफिशियल बेंच ने तुरंत खेल रुकवा दिया। स्थिति उस वक्त बदतर हो सकती थी अगर कोई गोल हो जाता। कोच टेरी वॉल्श ने बाद में स्वीकार किया कि यह उनकी गलती थी रोलिंग सब्स्टीट्यूशन के दौरान एक खिलाड़ी बाहर नहीं आ पाया और दूसरा अंदर पहुंच गया। वॉल्श ने अधिकारियों से इस गलती के लिए माफी मांगी तब खेल शुरू हुआ।
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यह वह जीत है जिसका इंतजार भारतीय हॉकी टीम एक अरसे से कर रही थी। भारतीय टीम के साथ रिक चार्ल्सवर्थ, होसे ब्रासा, माइकल नॉब्स जैसे दिग्गज कोच जुड़े लेकिन ओलंपिक चैंपियन जर्मनी को हराने का सौभाग्य उनके हिस्से में नहीं आया।
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वहीं आस्ट्रेलियाई कोच टेरी वॉल्श ने यह कारनामा टीम के साथ अपने पहले टूर्नामेंट में ही कर दिखाया। जी हां, वर्ल्ड हॉकी लीग फाइनल्स में भारत ने वर्ल्ड नंबर वन जर्मनी को 5-4 से परास्त कर दिया।
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मंदीप ने दागे तीन गोल
पहले मैन ऑफ द मैच मंदीप सिंह के तीन गोल और उसके बाद अंतिम मिनट में रूपिंदर पाल सिंह की ड्रैग फ्लिक से निकले गोल ने भारत को यह अप्रत्याशित जीत दिलाई।
वैसे तो लीग मुकाबले में भी भारत ने जर्मनी को चौंकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन मुकाबला 3-3 की बराबरी पर छूटा। आज जर्मनी बदली हुई लगी पहले छह मिनट में कप्तान ओलिवर कॉर्न (चौथे) और स्ट्रालकोवस्की ने गोल कर भारतीयों को बैकफुट पर ला दिया।
18वें मिनट में रघुनाथ की फ्री हिट पर डी के अंदर मंदीप सिंह ने गेंद को गोल की दिशा दी। नौ मिनट बाद ही जर्मनी ने वेस बेंजामिन के गोल की बदौलत बढ़त 3-1 कर ली। हॉफ टाइम तक यही स्कोर था।
रोमांचक हॉकी दूसरे हॉफ में देखने को मिली। 39वें मिनट में भारत को पहला पेनाल्टी कार्नर मिला जिसे रूपिंदर ने गोल में बदल दिया। अगले दोनों गोल भी मंदीप ने किए। लेकिन यह हमले एसवी सुनील ने बनाए।
पहले 41वें और उसके बाद 53वें मिनट में सुनील से मिले पासों को मंदीप ने गोल में पहुंचाया। हालांकि 49वें मिनट में जर्मनी को पेनाल्टी स्ट्रोक मिला लेकिन हाउके ने उसे बाहर फेंक दिया। 55वें मिनट में रघुनाथ को गोल से बाहर जल्द बाहर निकलने पर बाहर कर दिया गया।
आज बेल्जियम से होगा मुकाबला
मार्टिन हैनर ने इसका फायदा उठा 4-4 की बराबरी दिला दी। खेल खत्म होने में 35 सेकेंड रह गए थे। भारत को पेनाल्टी कार्नर मिल गया। कार्नर लेने में पूरे 70 मिनट खत्म हो गए। अब गोल हुआ तो भारत को जीतना था। रूपिंदर ने यही किया और भारत को जर्मनी पर एफआईएच के किसी आधिकारिक रैंकिंग टूर्नामेंट में 10 साल बाद जीत दिलाई।
लाहौर में हुई 2004 की चैंपियंस ट्रॉफी में भारत जर्मनी से जीता था। अब भारत शनिवार को पांचवें-छठे स्थान के लिए बेल्जियम से खेलेगा। जिसने न्यूजीलैंड को पेनाल्टी शूटआउट में 3-1 से हराया।
जब 12 खिलाड़ियों से खेला भारत
मैच में एक मौका ऐसा भी आया जब भारतीय टीम के 12 खिलाड़ी मैदान पर पहुंच गए। जबकि जर्मनी उस वक्त 10 खिलाड़ियों से खेल रही थी। मुकाबला उस वक्त 4-4 से बेहद रोमांचक मोड़ पर खड़ा था। हालांकि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चली।
ऑफिशियल बेंच ने तुरंत खेल रुकवा दिया। स्थिति उस वक्त बदतर हो सकती थी अगर कोई गोल हो जाता। कोच टेरी वॉल्श ने बाद में स्वीकार किया कि यह उनकी गलती थी रोलिंग सब्स्टीट्यूशन के दौरान एक खिलाड़ी बाहर नहीं आ पाया और दूसरा अंदर पहुंच गया। वॉल्श ने अधिकारियों से इस गलती के लिए माफी मांगी तब खेल शुरू हुआ।