{"_id":"59e705e94f1c1b87698b63ae","slug":"why-this-was-best-match-for-dhyanchand-in-his-carrier","type":"story","status":"publish","title_hn":"जानिए, बेइग्टन कप का मैच ध्यानचंद के लिए सबसे यादगार क्यों रहा ","category":{"title":"Hockey","title_hn":"हॉकी","slug":"hockey"}}
जानिए, बेइग्टन कप का मैच ध्यानचंद के लिए सबसे यादगार क्यों रहा
amarujala.com- presented by: शरद मिश्र
Updated Wed, 18 Oct 2017 01:12 PM IST
विज्ञापन
ध्यानचंद
- फोटो : The indian express
देश को तीन ओलंपिक में लगातार स्वर्ण पदक दिलाने वाले हॉकी के जादूगर ध्यानचंद ने अपने करियर में कई मैच जीते। लेकिन उन्हें जो मैच उनके पूरे जीवन में सर्वश्रेष्ठ लगा वह ओलंपिक का नहीं था। ध्यानचंद को 1933 में खेला गया बेइग्टन कप का फाइनल सबसे बेस्ट लगा। यह मैच कलकत्ता कस्टम और झांसी हीरोज के बीच खेला गया था। ध्यानचंद ने इस मैच के बारे में कहा था, 'अगर कोई मुझसे पूछे कि आपको अब तक सबसे बेस्ट मैच कौन सा लगा तो मैं बेझिझक 1933 के विघटन कप को अपना सबसे बेस्ट मैच कहूंगा'।
पढ़ेंः-बेहद संजीदगी से खेल-खेल में विपक्षियों को अनुशासन सिखा देते थे ध्यानचंद
यह मैच ध्यानचंद के सबसे यादगार रहा, इसकी कई वजह थीं। एक तो इस मैच में ध्यानचंद ने कोई भी गोल नहीं किया था। इस मैच को खेलकर वापसी में झांसी हीरोज यानी ध्यानचंद की टीम को ट्रेन की तीसरी श्रेणी के अनारक्षित डिब्बे में सफर करना पड़ा। इन दो वजहों से ध्यानचंद ने इस मैच को अपने करियर का सबसे बेस्ट मैच कहा।
विज्ञापन
पढ़ेंः- जानिए, सचिन तेंदुलकर कैसे हो गए भारत रत्न के लिए ध्यानचंद से आगे
ध्यानचंद ने 1935 में न्यूजीलैंड ऑस्ट्रेलिया के दौरे में 43 मैच खेले गए, जिसमें भारत ने 584 गोल किए। इनमें से 201 गोल ध्यानचंद ने किए थे।
ध्यानचंद को भारत रत्न दिलाने के लिए हस्ताक्षर करें यहां- goo.gl/hYuwMF
विज्ञापन
पढ़ेंः-बेहद संजीदगी से खेल-खेल में विपक्षियों को अनुशासन सिखा देते थे ध्यानचंद
विज्ञापन
यह मैच ध्यानचंद के सबसे यादगार रहा, इसकी कई वजह थीं। एक तो इस मैच में ध्यानचंद ने कोई भी गोल नहीं किया था। इस मैच को खेलकर वापसी में झांसी हीरोज यानी ध्यानचंद की टीम को ट्रेन की तीसरी श्रेणी के अनारक्षित डिब्बे में सफर करना पड़ा। इन दो वजहों से ध्यानचंद ने इस मैच को अपने करियर का सबसे बेस्ट मैच कहा।
विज्ञापन
पढ़ेंः- जानिए, सचिन तेंदुलकर कैसे हो गए भारत रत्न के लिए ध्यानचंद से आगे
ध्यानचंद ने 1935 में न्यूजीलैंड ऑस्ट्रेलिया के दौरे में 43 मैच खेले गए, जिसमें भारत ने 584 गोल किए। इनमें से 201 गोल ध्यानचंद ने किए थे।
ध्यानचंद को भारत रत्न दिलाने के लिए हस्ताक्षर करें यहां- goo.gl/hYuwMF