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जज्बा: कभी नसीब नहीं था पूरा खाना, अब फिटनेस में बड़ी टीमों को टक्कर देती है महिला हॉकी टीम

Tue, 03 Aug 2021 11:21 AM IST
Rajeev Rai हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Tue, 03 Aug 2021 11:21 AM IST
सार

19 से 21 के बीच है भारतीय महिला हॉकी टीम का औसत यो-यो टेस्ट स्कोर, इस मामले में ऑस्ट्रेलिया भी खाता है मात 

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Indian women hockey team Story of hard work and determination from sacrifices
भारतीय महिला हॉकी टीम - फोटो : twitter@TheHockeyIndia

विस्तार

यह टीम उन लड़कियों से मिलकर बनी है जिन्होंने जब हॉकी की स्टिक थामी थी तो ज्यादातर को दो वक्त की घर की रोटी भी नसीब नहीं थी। किसी की मां मजदूरी करती थी तो किसी के पिता दर्जी थे। किसी के पिता तांगा चलाते थे और हॉकी की स्टिक दिलाने तक के पैसे नहीं थे तो किसी के पिता फिटर थे। हॉकी पकड़ी तो किसी ने यह नहीं सोचा एक दिन ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचेंगे। बस खुशी इतनी थी कि पहनने के लिए जूते और टी शर्ट जो मिल रहे हैं। ये वही लड़कियां हैं जिन्हें पूरा खाना नहीं मिलने के चलते उनके प्रारंभिक प्रशिक्षक उन्हें शुरुआत में हॉकी पकड़ाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। सुविधाएं मिली तो आज यही लड़कियां दुनिया की सबसे फिट टीमों में शुमार हो गईं।

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भारतीय टीम की फिटनेस के आगे नतमस्तक कंगारू
हैरान होने की बात नहीं है। भारतीय महिला हॉकी टीम के यो-यो टेस्ट का औसत स्कोर 19 से 21 के बीच का है। भारत से मुंह की खाने वाला ऑस्ट्रेलिया भी इस मामले में उनके आगे मात खाता है। रियो ओलंपिक के दौरान चीनी पहलवान से पैर तुड़वाने वाली विनेश फोगाट को ठीक करने वाले दक्षिण अफ्रीकी फिजिकल ट्रेनर वायने लोंबार्ड ने महिला हॉकी टीम की सूरत बदलकर रख दी है। नेहा गोयल, निशा वारसी, शर्मिला की कोच पूर्व भारतीय कप्तान प्रीतम रानी सिवाच कहती हैं कि टोक्यो में ह्यूमिडिटी स्तर जितना है उसमें बिना उच्चस्तरीय फिटनेस के नहीं खेला जा सकता। आज के समय में हॉकी खेल के खिलाड़ी नहीं बना जा सकता है। फिटनेस बेहद जरूरी है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हम फिटनेस में नहीं मार खाए बल्कि इस मामले में आस्ट्रेलियाई टीम हमसे मार खा गई।

लोंबार्ड खिलाड़ियों को देते थे रोजाना नंबर
लड़कियों की फिटनेस पर पहले भी काम होता था, लेकिन उनकी रिकवरी नहीं होने के चलते वे चोटिल हो जाया करती थीं। लोंबार्ड ने इसकी अनोखी काट निकाली। उन्होंने फिटनेस कराने के बाद रिकवरी के लिए सभी खिलाड़ियों को नंबर देने का फैसला लिया। हायड्रोथेरेपी, मसाज, आधे घंटे की नींद, कूलिंग बैग, स्वीमिंग पूल जाने के लिए अलग-अलग नंबर निर्धारित किए गए। गूगल डॉक्यूमेंट पर जाकर खिलाड़ियों को एंट्री करनी होती थी और उसके बाद सभी को लोंबार्ड नंबर देते थे। इससे यह हुआ कि चोटिल होने की समस्या पर रोक लगी।

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दोपहर में सर्दी की जैकेट पहनकर की प्रैक्टिस
टोक्यो में ह्यूमिडिटी का स्तर और गर्मी काफी ज्यादा है। महिला को बंगलूरू में दोपहर में सर्दियों की जैकेट पहनाकर प्रैक्टिस कराई गई। जिससे टोक्यो में उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं आए। 

मैरी कॉम, दंगल और जार्डन की बायोपिक देखी
लॉकडाउन के चलते टीम बंगलूरू में बायो सिक्योर बबल में तैयारी कर रही थी। यह काफी कठिन समय था। ऐसे में टीम मैनेजमेंट ने खिलाड़ियों को प्रेरित करने के लिए हिंदी फिल्म मैरी कॉम, दंगल और माइकल जार्डन की बायो पिक दिखाने का फैसला लिया। इन फिल्मों ने खिलाड़ियों इस दौरान खूब प्रेरित किया। 

कोरोना होने के बाद की वापसी
बंगलूरू शिविर में एक समय में कप्तान रानी रामपाल समेत सात से आठ खिलाड़ी कोरोना संक्रमित हो गए। बावजूद इसके इन सभी खिलाड़ियों ने कठिन समय का सामना करते हुए जबरदस्त वापसी की।

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