भारतीय हॉकी के पूर्व कप्तान मोहम्मद शाहिद का निधन
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भारतीय हॉकी टीम के महानतम खिलाड़ियों में से एक मोहम्मद शाहिद का निधन हो गया है। बीती रात उनकी तबीयत काफी खराब हो गई थी और कोमा में चले गए थे।
मीडिया से जुड़े सूत्रों के अनुसार वह मंगलवार की रात कोमा में चले गए थे और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। उनकी तबीयत बिगड़ जाने के बाद उनके सेहत को लेकर सोशल मीडिया खासकर ट्विटर पर काफी ट्वीट्स होने लगे। रात में #prayforshahid ट्रेंड भी करने लगा था।
56 साल के महान हॉकी खिलाड़ी इस समय गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें जून के अंतिम हफ्ते में अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उन्होंने 20 जुलाई को अंतिम सांस ली।
मूल रुप से वाराणसी के रहने वाले मोहम्मद शाहिद ने भारतीय हॉकी टीम को नए आयाम पर पहुंचाया था। उन्हें पद्मश्री, अर्जुन अवार्ड और अन्य उपाधियों से नवाजा जा चुका है।
वह पीलिया समेत कई तरह की बीमारी से ग्रस्त थे।
1979 में भारत के लिए खेला था अपना पहला मैच
हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद अपनी ड्रिब्लिंग के लिए मशहूर थे। उन्होंने भारत के लिए पहला मैच 1979 में फ्रांस में खेले गए जूनियर वर्ल्ड कप में खेला था। साथ ही वह 1980 में मास्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे थे।
भारत ने ओलंपिक में आखिरी बार 1980 में ही कोई पदक जीता था। उन्हें 1980 में अर्जुन अवार्ड और 1986 में पद्मश्री से नवाजा गया था।
हॉकी में उनकी स्पीड गजब की थी और अपनी लाजवाब ड्रिब्लिंग के लिए खासा पहचान रखते थे।
भारत सरकार और यूपी सरकार कर रही थी आर्थिक मदद
अपने जमाने के हॉकी के कलाकार कहे जाने वाले भारत के पूर्व कप्तान मोहम्मद शाहिद पिछले महीने गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे और गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इसके बाद भारत के एक और पूर्व हॉकी कप्तान ओलंपियन धनराज पिल्लै ने शाहिद को आर्थिक मदद मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , खेल मंत्रालय और भारतीय रेलवे से अनुरोध किया था। बाद में सरकार ने आर्थिक मदद देने का ऐलान कर दिया।
केंद्रीय खेल राज्य मंत्री जीतेंद्र सिंह ने शाहिद पर इलाज के अलावा अतिरिक्त खर्च के लिए उन्हें दस लाख रुपये और देने की घोषणा की थी। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी शाहिद को पांच लाख रुपये देने की मंजूरी दी। शाहिद भारतीय रेलवे में कार्यरत थे। उनके इलाज का पूरा खर्च भारतीय रेलवे उठा रहा था।