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अपना हिसाब करने भारत आए बर्खास्त कोच नॉब्स

Tue, 16 Jul 2013 04:46 PM IST
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी Updated Tue, 16 Jul 2013 04:46 PM IST
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ex coach nobbs returns to India to settle dues

वर्ल्ड हॉकी लीग में भारतीय टीम की दुर्दशा के बाद चीफ कोच पद से बर्खास्त कर दिए गए ऑस्ट्रेलियाई कोच माइकल नॉब्स अपना हिसाब-किताब पूरा करने भारत आ गए हैं। साई ने नॉब्स का जून माह का वेतन रोक लिया था।

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लेकिन वह इस देश से अपनी विदाई बिना किसी विवादों के चाहते हैं। यही कारण है कि वह अभी भी यही कह रहे हैं कि उन्होंने अपनी तबीयत खराब (ब्लड प्रेशर और नजर कमजोर) होने की वजह से इस्तीफा दिया है।
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यही नहीं वह न तो लंदन ओलंपिक में भारतीय टीम के प्रदर्शन पर बोलना चाहते हैं और न ही शिवेंद्र सिंह और संदीप सिंह पर कोई टिप्पणी करना चाहते हैं।

हां, उन्हें एक बात जरूर खराब लगी है। वह है साई की ओर से उनके बर्खास्तगी पत्र में जून माह के वेतन को रोके जाने की बात। नॉब्स साफ करते हैं कि वह बुधवार को साई के महानिदेशक जीजी थॉमसन से इस संबंध में बात करने जा रहे हैं।
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वेतन रोके जाने के संबंध में नॉब्स ने साफ किया कि उन्होंने साई के साथ अनुबंध की किसी भी शर्त को नहीं तोड़ा है। फिर पत्र में वेतन रोके जाने की बात उन्हें समझ में नहीं आती है।

लेकिन उन्हें उम्मीद है कि साई डीजी के साथ बातचीत में यह मामला सुलझ जाएगा। वहीं हॉकी इंडिया के हाई परफॉरमेंस डायरेक्टर (एचपीडी) रोलैंट ओल्टमेंस के साथ रिश्तों पर नॉब्स कहते हैं कि एचपीडी की तैनाती की बात उन्होंने ही की थी। हां, उनकी तैनाती के बाद हॉकी इंडिया ने उनसे बात करना कम कर दिया लेकिन यह सिस्टम का हिस्सा था।

'पहले ही की थी पद छोड़ने की इच्छा'
उन्होंने खुद ओल्टमेंस से पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की। नॉब्स यह जरूर स्वीकार करते हैं कि भारत में कोचिंग देना कठिन और चुनौतीपूर्ण काम है।

उनके अनुसार उन्होंने ठीक काम किया है। लेकिन आम जनता की उम्मीदें अधिक हैं। ऐसे में परिणाम नहीं मिलना कोच की गलती है या फिर सिस्टम की यह खुद तय करने वाली बात है।


रही बात बात वर्ल्ड हॉकी लीग-3 में प्रदर्शन की तो टीम ने अपनी रैंकिंग के हिसाब से प्रदर्शन किया है। टीम न उससे ऊपर गई है और न नीचे आई है। एशियाई टीमों को भारत लगातार हराता आया है, लेकिन यूरोपीयों के समक्ष उसे सफलता नहीं मिली है। यही हॉलैंड में हुआ है।

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