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अब आप भी देख सकेंगे 'हॉकी के जादूगर' की बरसों पुरानी कलाकारी
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी
Updated Thu, 29 Aug 2013 11:48 AM IST
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'हॉकी के जादूगर' मेजर ध्यानचंद के 108वें जन्म दिवस पर हॉकी के दीवानों के लिए एक बेहद शानदार खबर है। जिन लोगों ने ध्यानचंद को मैदान पर खेलते नहीं देखा था अब उन्हें देख सकते हैं।
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1936 के ऐतिहासिक बर्लिन ओलंपिक के फाइनल मुकाबले की फुल वीडियो रिकॉर्डिंग के बारे में पता चला है।
उस समय 31 साल के ध्यानचंद ने फाइनल मुकाबले में हैट्रिक गोल दागा था। बर्लिन ओलंपिक खेल में पांच मैचों में ध्यानचंद की टीम ने 38 गोल दागे थे जबकि एक गोल ही खाया था।
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अब उनके बेटे और पूर्व ओलंपियन अशोक कुमार ने उस वीडियो रिकॉर्डिंग का पता लगाने और उसे देश में लाने का बीड़ा उठाया है।
जर्मनी दूतावास से इसके लिए संपर्क साधा जा चुका है। यही नहीं वह इसके लिए खेल मंत्रालय से भी बात करने जा रहे हैं।
अशोक कहते हैं कि गुरुवार को दद्दा का जन्म दिन है। अगर यह वीडियो मिल जाता है तो यह उनके लिए बहुत बड़ी श्रद्धांजलि होगी।
इस प्रयास का सारा श्रेय उस शख्स को जाता है जिन्होंने अपना जीवन ध्यानचंद पर शोध और उनसे जुड़ी जानकारियों को एकत्र करने में लगा रखा है।
बैतूल (मध्य प्रदेश) में रहने वाले हेमंत दुबे कैंसर से जूझ रहे हैं। लेकिन द्ददा से जुड़ी कोई भी जानकारी जुटाने में आज वह नहीं चूकते हैं। अशोक के मुताबिक हेमंत ने ही उन्हें बताया कि इस मैच की रिकार्डिंग जर्मनी में मौजूद है।
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यह रिकार्डिंग उस वक्त लेनी रिफेनस्टाल नाम की महिला ने की थी। उन्होंने 1938 में इस ओलंपिक पर ओलंपिया नाम की एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई जो काफी चर्चित रही। लेनी की सौ वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई।
लेकिन हेमंत को पता लगा है कि लेनी के परिवार के पास यह वीडियो रिकार्डिंग है। अब कोशिश यह हो रही है कि किसी तरह उनके परिवार का पता ढूंढकर इस वीडियो रिकार्डिंग को निकलवाया जाए।
जर्मनी दूतावास ने इसमें मदद का भरोसा दिलाया है। लेनी का परिवार बर्लिन में ही रहता है।
अशोक कहते हैं कि अगर यह वीडियो मिल जाता है, तो इसे राष्ट्रीय धरोहर बनाया जा सकता है। हालांकि बर्लिन के उस फाइनल के डॉक्यूमेंट्री में कुछ अंश मौजूद हैं।
पूरे मैच की रिकार्डिंग होने पर यह पता लग सकेगा कि दद्दा के अलावा उस जमाने के खिलाड़ी किस तरह खेलते थे। यह मुकाबला भारत ने 8-1 से जीता था।