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बबिता के बाद गीता ने कांस्य पदक जीता
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 29 Sep 2012 11:04 PM IST
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परिवार का कोई बच्चा वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीते तो माता-पिता की छाती दोगुनी होना तय है। और एक नहीं, बल्कि दो बहनें एक साथ पदक ले आएं तो फिर कहने ही क्या। लेकिन भिवानी जिले के बलाली गांव के महावीर सिंह को उनकी बेटियों गीता और बबिता की यह उपलब्धि भी रिझा नहीं पा रही है। उनके दिलो-दिमाग पर पूरी तरह ओलंपिक पदक का जुनून छाया है।
महावीर ने तो इस पदक के लिए लंदन ओलंपिक में भाग लेने वाली बड़ी बेटी गीता की शादी कुछ दिनों के लिए नहीं बल्कि 2016 के रियो डि जेनेरियो ओलंपिक तक टालने का फैसला ले डाला है। यही नहीं उनकी पत्नी दया कौर ने बेटियों को ओलंपिक की तैयारियां कराने के लिए गांव के सरपंच पद से इस्तीफा भी दे दिया है।
हालांकि उनका इस्तीफा अभी राज्य सरकार ने मंजूर नहीं किया है। देश में ऐसा परिवार शायद ही हो जहां दो बहनों ने एक ही वर्ल्ड चैंपियनशिप में एक साथ दो पदक जीते हों। 51 किलो में बबिता के बाद 55 किलो में गीता ने शुक्रवार की रात एडमंटन में कांस्य पदक जीत लिया।
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पांच पहलवान बेटियों के पिता महावीर ने अमर उजाला से कहा कि उन्हें खुशी जरूर है लेकिन उनके कलेजे को तभी ठंडक मिलेगी, जब उनकी बेटियां रियो ओलंपिक में पदक जीतेंगी। लंदन में गीता की हार के बाद उन्होंने निर्णय लिया कि बेटियों के साथ मां का रहना जरूरी है। जिसके चलते उन्होंने बीते सप्ताह बलाली के सरपंच से पद से पत्नी दया कौर को इस्तीफा दिला दिया है।
अब वह गीता व बबिता के साथ पटियाला जाकर रहेंगी। उनके खाने-पीने पर ध्यान देंगी। लंदन की हार के बाद उन्हें महसूस हुआ कि गीता की गर्दन व कमर कमजोर है। इस ओलंपिक के बाद गीता की शादी भी होनी थी। लेकिन महावीर का कहना है कि उनकी बेटी में ओलंपिक पदक लाने की क्षमता है। शादी इसमें बाधक बन सकती है।
इसके लिए उन्होंने अगले चार वर्षों के लिए उसकी शादी टालने का फैसला किया है। यही नहीं महावीर आश्वासन देते हैं कि 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में उनकी दो बेटियां गीता और बबिता ही नहीं बल्कि छोटी बेटी रितु भी पदक लेकर आएगी। उनकी दो सबसे छोटी बेटियां दिनेश और प्रियंका भी देश की जूनियर में टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
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महावीर ने तो इस पदक के लिए लंदन ओलंपिक में भाग लेने वाली बड़ी बेटी गीता की शादी कुछ दिनों के लिए नहीं बल्कि 2016 के रियो डि जेनेरियो ओलंपिक तक टालने का फैसला ले डाला है। यही नहीं उनकी पत्नी दया कौर ने बेटियों को ओलंपिक की तैयारियां कराने के लिए गांव के सरपंच पद से इस्तीफा भी दे दिया है।
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हालांकि उनका इस्तीफा अभी राज्य सरकार ने मंजूर नहीं किया है। देश में ऐसा परिवार शायद ही हो जहां दो बहनों ने एक ही वर्ल्ड चैंपियनशिप में एक साथ दो पदक जीते हों। 51 किलो में बबिता के बाद 55 किलो में गीता ने शुक्रवार की रात एडमंटन में कांस्य पदक जीत लिया।
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पांच पहलवान बेटियों के पिता महावीर ने अमर उजाला से कहा कि उन्हें खुशी जरूर है लेकिन उनके कलेजे को तभी ठंडक मिलेगी, जब उनकी बेटियां रियो ओलंपिक में पदक जीतेंगी। लंदन में गीता की हार के बाद उन्होंने निर्णय लिया कि बेटियों के साथ मां का रहना जरूरी है। जिसके चलते उन्होंने बीते सप्ताह बलाली के सरपंच से पद से पत्नी दया कौर को इस्तीफा दिला दिया है।
अब वह गीता व बबिता के साथ पटियाला जाकर रहेंगी। उनके खाने-पीने पर ध्यान देंगी। लंदन की हार के बाद उन्हें महसूस हुआ कि गीता की गर्दन व कमर कमजोर है। इस ओलंपिक के बाद गीता की शादी भी होनी थी। लेकिन महावीर का कहना है कि उनकी बेटी में ओलंपिक पदक लाने की क्षमता है। शादी इसमें बाधक बन सकती है।
इसके लिए उन्होंने अगले चार वर्षों के लिए उसकी शादी टालने का फैसला किया है। यही नहीं महावीर आश्वासन देते हैं कि 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में उनकी दो बेटियां गीता और बबिता ही नहीं बल्कि छोटी बेटी रितु भी पदक लेकर आएगी। उनकी दो सबसे छोटी बेटियां दिनेश और प्रियंका भी देश की जूनियर में टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।