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बारकोडिंग युक्त होता है हर कार का टायर
ग्रेटर नोएडा/अमित कुमार बाजपेयी
Updated Mon, 22 Oct 2012 03:17 PM IST
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यूं तो फॉर्मूला-1 रेस में रफ्तार का रोमांच देखना सभी को भाता है। लेकिन इस खेल के पीछे सख्त नियमों की जानकारी कम लोगों को ही होती है। फेडरेशन इंटरनेशनॉले डी ऑटोमोबाइल (एफआईए) द्वारा बनाए गए नियमों के अंतर्गत एफ-1 कार में लगे टायर पर निरीक्षण और नियमों की सख्ती के चलते बार कोडिंग की जाती है। जो इस रेस को सबसे ज्यादा अनुशासनात्मक बनाती है।
दरअसल, इस रेस के लिए बनाए गए हर नियम के कारण ही इसे फॉर्मूला-1 का नाम दिया गया है। दुनिया के अन्य किसी मोटर स्पोर्ट्स में इतने सख्त नियम नहीं होते हैं। एफआईए हर वर्ष नियमों और कुछ नीतियों में जरूरत व वक्त की मांग के मुताबिक बदलाव करती रहती है। इनमें टायरों के लिए भी बनाए गए विशेष नियम होते हैं।
एफ-1 में फिलहाल पिरेली कंपनी ही हर टीम को एक जैसे टायर मुहैया कराती है। इससे परीक्षण और विकास की कीमत कम होने के साथ ही नजदीकी प्रतिस्पर्धा होने की संभावना बढ़ जाती है।
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टायरों में बार कोडिंग
- फॉर्मूला-1 की टीमों की सभी कारों में लगने वाले टायरों में बार कोडिंग होती है
- रेस वीकेंड से पूर्व हर टीम, ड्राइवर की कार के लिए अलग-अलग होती है बारकोडिंग
- बारकोड रीडर से हो जाती है हर टायर की पहचान
- एफआईए इनसे हर टायर के इस्तेमाल संबंधी जानकारी भी जुटाता है
- बारकोडिंग यह भी सुनिश्चित करती है कि कोई ड्राइवर या टीम नियमों में छेड़छाड़ तो नहीं कर रही
2012 के टायरों के नियम
- हर जीपी में टीमों को दो तरह के ड्राई वेदर टायर इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है
- यदि मौसम गीला-बारिश का नहीं है तो ड्राइवर्स को रेस के दौरान दोनों प्रकार के टायरों को इस्तेमाल करने जरूरी होते हैं
- हर टायर के साइड में दिए गए रंग को देखने से ही उसके प्रकार की जानकारी मिल जाती है
- हर रेस वीकेंड में एक ड्राइवर को 18 विभिन्न टायरों के सेट दिए जाते हैं
- इनमें छह हार्ड-प्राइम और पांच सॉफ्ट-ऑप्शन, चार इंटरमीडिएट और तीन वेट टायर स्पेसिफिकेशन के होते हैं
- फाइनल रेस के दौरान क्वॉलीफाईंग-3 में इस्तेमाल किए गए टायर ही कारों में लगे होने चाहिए
टायरों के प्रकार और कलर
रंग-------------प्रकार
लाल------------सुपर सॉफ्ट
पीला------------सॉफ्ट
सफेद------------मीडियम
सिल्वर------------हार्ड
नीला------------वेट
हरा------------इंटरमीडिएट
वेट कंडीशन के नियम
टीमों द्वारा सही स्थिति सुनिश्चित होने पर वेट टायर का इस्तेमाल क्वॉलीफाईंग रेस के लिए किया जा सकता है। हालांकि प्रैक्टिस सत्र के बाद यदि रेस डायरेक्टर ट्रैक को वेट घोषित कर देता है तो ही वेट टायर इस्तेमाल हो सकते हैं। अत्यधिक बारिश वाली स्थिति में यदि सभी कारें सेफ्टी कार्स के पीछे चलती हैं तो वेट टायर्स का इस्तेमाल जरूरी होता है।
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दरअसल, इस रेस के लिए बनाए गए हर नियम के कारण ही इसे फॉर्मूला-1 का नाम दिया गया है। दुनिया के अन्य किसी मोटर स्पोर्ट्स में इतने सख्त नियम नहीं होते हैं। एफआईए हर वर्ष नियमों और कुछ नीतियों में जरूरत व वक्त की मांग के मुताबिक बदलाव करती रहती है। इनमें टायरों के लिए भी बनाए गए विशेष नियम होते हैं।
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एफ-1 में फिलहाल पिरेली कंपनी ही हर टीम को एक जैसे टायर मुहैया कराती है। इससे परीक्षण और विकास की कीमत कम होने के साथ ही नजदीकी प्रतिस्पर्धा होने की संभावना बढ़ जाती है।
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टायरों में बार कोडिंग
- फॉर्मूला-1 की टीमों की सभी कारों में लगने वाले टायरों में बार कोडिंग होती है
- रेस वीकेंड से पूर्व हर टीम, ड्राइवर की कार के लिए अलग-अलग होती है बारकोडिंग
- बारकोड रीडर से हो जाती है हर टायर की पहचान
- एफआईए इनसे हर टायर के इस्तेमाल संबंधी जानकारी भी जुटाता है
- बारकोडिंग यह भी सुनिश्चित करती है कि कोई ड्राइवर या टीम नियमों में छेड़छाड़ तो नहीं कर रही
2012 के टायरों के नियम
- हर जीपी में टीमों को दो तरह के ड्राई वेदर टायर इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है
- यदि मौसम गीला-बारिश का नहीं है तो ड्राइवर्स को रेस के दौरान दोनों प्रकार के टायरों को इस्तेमाल करने जरूरी होते हैं
- हर टायर के साइड में दिए गए रंग को देखने से ही उसके प्रकार की जानकारी मिल जाती है
- हर रेस वीकेंड में एक ड्राइवर को 18 विभिन्न टायरों के सेट दिए जाते हैं
- इनमें छह हार्ड-प्राइम और पांच सॉफ्ट-ऑप्शन, चार इंटरमीडिएट और तीन वेट टायर स्पेसिफिकेशन के होते हैं
- फाइनल रेस के दौरान क्वॉलीफाईंग-3 में इस्तेमाल किए गए टायर ही कारों में लगे होने चाहिए
टायरों के प्रकार और कलर
रंग-------------प्रकार
लाल------------सुपर सॉफ्ट
पीला------------सॉफ्ट
सफेद------------मीडियम
सिल्वर------------हार्ड
नीला------------वेट
हरा------------इंटरमीडिएट
वेट कंडीशन के नियम
टीमों द्वारा सही स्थिति सुनिश्चित होने पर वेट टायर का इस्तेमाल क्वॉलीफाईंग रेस के लिए किया जा सकता है। हालांकि प्रैक्टिस सत्र के बाद यदि रेस डायरेक्टर ट्रैक को वेट घोषित कर देता है तो ही वेट टायर इस्तेमाल हो सकते हैं। अत्यधिक बारिश वाली स्थिति में यदि सभी कारें सेफ्टी कार्स के पीछे चलती हैं तो वेट टायर्स का इस्तेमाल जरूरी होता है।