पीवी सिंधु ने कॉमनवेल्थ खेलों के बहिष्कार वाले बयान पर दी सफाई, कहा- देश सर्वोपरि
- बर्मिंघम में होने वाले कॉमनवेल्थ खेल 2022 से शूटिंग बाहर
- नाराज भारत कर रहा इन खेलों पर बहिष्कार का विचार
- चिंतित कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन भारतीय अधिकारियों से करेगा बात
- भारतीय खिलाड़ी दे रहे बहिष्कार मामले पर अलग-अलग राय
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विस्तार
पीवी सिंधु ने कॉमनवेल्थ खेलों के बहिष्कार मामले में दिए अपने एक बयान पर सफाई पेश की है। शीर्ष भारतीय शटलर ने ट्वीट करते हुए कहा कि उनके लिए देश सर्वोपरि है। भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन और भारत सरकार इस मामले में जो भी निर्णय लेगा, वह उसके साथ है। जय हिंद।
सिंधु यहीं नहीं रूकी। उन्होंने एक अंग्रेजी समाचार पत्र और उसके रिपोर्टर को आड़े हाथों लेते हुए अपने बयान को तोड़मरोड़ कर पेश करने का आरोप भी लगाया। 24 वर्षीय महिला एथलीट ने कहा कि, 'उन्होंने मुझे गलत तरीके से समझा जहां मैंने बतौर खिलाड़ी स्पष्ट तौर पर कहा था कि हम सभी किसी भी खेल स्पर्धा में भाग लेना चाहते हैं, लेकिन भारतीय ओलंपिक संघ और हमारी सरकार जो भी निर्णय लेती है मैं उसका हमेशा समर्थन करूंगी। इसके बाद अब सोशल मीडिया पर देश के कई खेल प्रेमी पीवी सिंधु के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
आखिर क्या है पूरा मामला?
बर्मिंघम में होने वाले कॉमनवेल्थ खेल 2022 में शूटिंग शामिल नहीं होगा। इससे नाराज भारत इन खेलों पर बहिष्कार का विचार कर रहा है। भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने खेल मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिखकर आगामी कॉमनवेल्थ खेलों के बहिष्कार प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बैठक की मांग की है। ओलंपिक संघ के इस फैसले के बाद भारतीय एथलीट भी दो धड़ों में बंट गए हैं। कुछ भारत के इस फैसले के समर्थन में नजर आ रहे हैं तो कोई विरोध में खड़ा है।
किसने क्या कहा?
ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता अभिनव बिंद्रा ने ट्वीट कर कहा, 'बहिष्कार से आपका प्रभाव नहीं बढ़ता। यह सिर्फ आपको अप्रासंगिक बना देता है और इसकी सजा अन्य खिलाड़ियों को मिलती है। बेहतर होता अगर आईओए अभियान चलाकर राष्ट्रमंडल खेलों की समितियों में समर्थन हासिल करता और भविष्य में निशानेबाजी को कोर खेलों की सूची में शामिल कराने का प्रयास करता।'
2/2 Boycotts don’t win you influence. They just make you irrelevant and punish other athletes. Would be far better if IOA did a campaign to load the CWG committees with their people and allies and push for the inclusion of shooting onto the core list of sports for the future.
— Abhinav Bindra OLY (@Abhinav_Bindra) July 28, 2019
भारत की दिग्गज निशानेबाज हिना सिद्धू ने हाल ही में कहा था कि भारत को 2022 में बर्मिघम में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के बहिष्कार के बारे में विचार करना चाहिए। हिना के बयान के बाद आईओए के अध्यक्ष नरेंदर बत्रा ने कहा था कि खेलों का बहिष्कार एक विकल्प हो सकता है।
साक्षी मलिक ने कहा कि, 'हम यह नहीं कहें कि हम इन खेलों का बहिष्कार करेंगे। मुझे उम्मीद है कि निशानेबाजी को इसमें शामिल किया जाएगा और हम सभी बर्मिंघम जाएंगे। आईओए जो भी फैसला करने की योजना बना रहा है वह सही है, क्योंकि जो भी खेल बाहर किया गया यह उसके खिलाड़ियों के साथ गलत है। हमारे निशानेबाज ढेर सारे पदक लेकर आते हैं। मैं इसे संपूर्ण दल के रूप में देखती हूं। अगर एक खेल भी प्रभावित होता है तो यह अनुचित है।'
शूटिंग के हटने से भारत को सीधा नुकसान
जून में कॉमनवेल्थ खेल महासंघ (सीजीएफ) ने फैसला किया था कि 2022 में होने वाले खेलों में निशानेबाजी को जगह नहीं दी जाएगी। 1970 के बाद से ऐसा पहली बार होगा कि राष्ट्रमंडल खेलों में निशानेबाजी नहीं होगी। इससे भारत को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि इन खेलों में अगर भारत मेडल तालिका में आगे रहता है तो इसके पीछे एक बड़ी वजह निशानेबाजी में जीते मेडल होते हैं।
सीजीएफ ने रविवार को कहा कि वे चाहते हैं कि भारत 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ खेलों में हिस्सा ले। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने राष्ट्रमंडल खेलों से निशानेबाजी को हटाने पर इन खेलों के बहिष्कार का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा है, जिसके बाद सीजीएफ ने यह प्रतिक्रिया दी। सीजीएफ ने कहा कि वे निकट भविष्य में आईओए अधिकारियों से मिलना चाहते हैं जिससे कि चिंताओं का हल निकाला जा सके।