यूथ ओलंपिक्स 2018: इतिहास रचने से चूके उत्तराखंड के लक्ष्य सेन, रजत पदक से करना पड़ा संतोष
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पूर्व जूनियर विश्व नंबर-1 भारतीय शटलर लक्ष्य सेन को शुक्रवार को यूथ ओलंपिक्स 2018 में रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारतीय शटलर को पुरुष सिंगल्स बैडमिंटन फाइनल में चीन के शिफेंग ली के हाथों 15-21, 19-21 से शिकस्त झेलनी पड़ी।
17 वर्षीय लक्ष्य सेन की चुनौती 42 मिनट में समाप्त हुई। चौथी वरीय शटलर ने दूसरे मैच में जरूर दमदार खेल दिखाया और चार मैच प्वाइंट सुरक्षित किए। मगर चीनी शटलर ने मौके को हाथ से जाने नहीं दिया और दूसरे गेम के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
पहले गेम में शेफिंग ने भारतीय शटलर पर पूरी तरह दबदबा बरकरार रखा और बिना देरी किए 14-5 की बढ़त बनाई। सेन ने फिर जोरदार वापसी करते हुए स्कोर 13-16 किया, लेकिन शेफिंग ने दोबारा लय हासिल करते हुए 18-13 की बढ़त बना ली और फिर 20-14 स्कोर करते हुए छह गेम प्वाइंट अपने पक्ष में किए। सेन ने हालांकि, एक मैच प्वाइंट जरूर बचाया, लेकिन चीनी शटलर ने 17 मिनट में पहला गेम अपने नाम किया।
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— Lakshya Sen (@lakshya_sen) October 13, 2018
सेन के रजत पदक से भारत के यूथ ओलंपिक में पदकों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। लक्ष्य सेन यूथ ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले भारत के दूसरे शटलर बने। इससे पहले 2010 में एचएस प्रणॉय ने भी रजत पदक जीता था।