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Tokyo Paralympics: स्पोर्ट्स कप्तान थे फिर भी मिलते थे कम लंबाई के ताने, कृष्णा को तानों से बचाने को पिता ने थमाया रैकेट

Mon, 06 Sep 2021 09:33 AM IST
Rajeev Rai हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Mon, 06 Sep 2021 09:33 AM IST
सार

  • स्पोर्ट्स कप्तान थे फिर भी मिलते थे कम लंबाई के ताने
  • पिता के लिए जीता स्वर्ण कोरोना वारियर्स को किया समर्पित

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Krishna nagar wins gold medal in tokyo paralympic once taunted for small height
कृष्णा नागर - फोटो : social media

विस्तार

स्कूल में स्पोर्ट्स कप्तान और कॉलेज में क्रिकेट, फुटबॉल, एथलेटिक्स के माहिर खिलाड़ी होने के बावजूद चार फुट पांच इंच के कृष्णा नागर की कम लंबाई उनकी दुश्मन बन गई थी। कॉलेज में जब कृष्णा को लड़के-लड़कियां उनकी लंबाई को लेकर ताने मारने लगे तो उन्हें बुरा लगने लगा। उनके पिता सुनील नागर को इसका पता लगा तो उन्होंने कृष्णा से कहा तुम छोटे हो इसी लिए लोग तुम्हें छोटा बोल रहे हैं, इसमें दिल पर लेने वाली बात क्या है, लेकिन पिता दिमाग का बोझ हटाने केलिए उन्हें जयपुर के सवाई मान सिंह स्टेडियम में बैडमिंटन खिलाने ले गए। पिता ने कृष्णा से कहा अच्छा खेलोगो तो लोग सराहना करेंगे। इसी को कृष्णा ने ताकत बना बैडमिंटन को अपना लिया।

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परिवार के लिए पिता महज साढ़े तीन घंटे सोए

कृष्णा खुलासा करते हैं कि वह पहले आम इंसानों के साथ खेलते थे और उन्होंने जिला स्तर का टूर्नामेंट भी जीता। दिसंबर 2017 में उन्हें पैरा बैडमिंटन के बारे में पता लगा। 2018 में वह राष्ट्रीय चैंपियन भी बन गए। वैसे तो कृष्णा ने अपना स्वर्ण कोरोना वॉरियर्स को समर्पित किया है, लेकिन वह अपने पिता के लिए स्वर्ण जीतना चाहते थे। उनके पिता उन्हें खिलाड़ी बनाने के लिए 24 घंटे में महज साढ़े तीन घंटे सोए। वह सुबह चार बजे से पैसे कमाने के लिए लोगों को फिटनेस की ट्रेनिंग देते थे। पिता चाहते थे कि वह स्वर्ण जीतें। दरअसल जकार्ता एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में हारने का कृष्णा को बेहद दुख था। वह किसी भी कीमत पर यह सेमीफाइनल हारना नहीं चाहते थे। उन्होंने इस कड़वी याद को धो दिया है। यही वजह है कि अंतिम अंक पर उन्होंने शटल को मुड़कर भी नहीं देखा और सीधे कोच गौरव खन्ना की गोद में छलांग लगा दी।

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मैदान में गड्ढा खोद लगाते थे जंप

कृष्णा खिलाड़ियों के परिवार से हैं। उनके पिता जूडो, ताईक्वांडो, बेसबॉल, सॉफ्टबॉल के खिलाड़ी रहे हैं। उनके चाचा फुटबॉल और दोनों बुआ भी खिलाड़ी रहे हैं। पिता फिजिकल ट्रेनर हैं। यही कारण है कि उन्होंने बचपन से ही खेलों को अपना लिया। 10 साल की उम्र में उनके पिता घर के सामने मैदान में गड्ढा खुदवाकर उन्हें लंबी, त्रिकूद और ऊंची कूद करवाने लगे। कृष्णा को लंबी कूद में महारत हासिल है। यही कारण है कि बैडमिंटन कोर्ट पर उछलकर स्मैश मारना उन्हें अच्छा लगता है।

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