चाइना ओपन सुपर सीरीज से नाम वापस लेते ही श्रीकांत का वर्ल्ड नंबर-1 बनने का सपना टूटा
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विश्व के दूसरे नंबर के बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने 14 नवंबर से शुरू होने वाले चाइना ओपन सुपर सीरीज प्रीमियर से अपना नाम वापस ले लिया है। इससे यही कयास लगाया जा रहा है कि लगातार बैडमिंटन खेलने का असर किदांबी श्रीकांत पर नजर आने लगा है।
गौरतलब है कि श्रीकांत 18 अक्टूबर से लगातार बैडमिंटन खेल रहे हैं। उन्होंने लगातार डेनमार्क ओपन और फ्रेंच ओपन सुपर सीरीज टाइटल जीते। उसके बाद वो नागपुर में खेले गए 82वीं सीनियर बैडमिंटन राष्ट्रीय चैंपियनशिप के फाइनल में एचएस प्रणॉय से हार गए। एचएस प्रणॉय ने किदांबी श्रीकांत को खिताबी मुकाबले में 21-15, 16-21, 21-7 से हराकर बैडमिंटन की नेशनल चैंपियनशिप जीत ली। हालांकि, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नागपुर में 8 नवंबर को हुई सीनियर नैशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप के दौरान श्रीकांत पैर की चोट से जूझ रहे थे।
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बता दें कि चाइना ओपन से हटने के बाद 24 वर्षीय श्रीकांत ने नवंबर में ही दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी बनने का एक शानदार मौका गंवा दिया। श्रीकांत के 73403 अंक है। वह दुनिया के पहले पायदान के खिलाड़ी डेनमार्क के विक्टर एक्सलसेन से 4527 अंक पीछे हैं।
श्रीकांत फिलहाल अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हैं। हालांकि वो नैशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप में हार गए। चाइना ओपन जीतने के बाद वह दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी बन जाते। बताया जा रहा है कि उनका 21 नवंबर से शुरू हो रहे हॉन्ग कॉन्ग ओपन में खेलना भी मुश्किल है।
टॉप बैडमिंटन खिलाड़ियों पर नेशनल में खेलने के लिए दबाव
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि टॉप बैडमिंटन खिलाड़ियों पर नेशनल में खेलने के लिए दबाव डालने से चाइना और हॉन्ग कॉन्ग में उनके प्रदर्शन पर असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा, 'बैडमिंटन असोसिएशन ऑफ इंडिया की खराब प्लानिंग का असर हमारे खिलाड़ियों पर पड़ा। आप बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नमेंट्स के बीच में नैशनल कैसे खेल सकते हैं? अब हमारा सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी लगातार खेलते रहने के कारण चोटिल हो गया। उसने नंबर वन खिलाड़ी बनने का मौका सुनहरा मौका गंवा दिया।' उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अन्य खिलाड़ियों से ज्यादा उम्मीद नहीं हैं क्योंकि उन्हें प्रैक्टिस करने का ज्यादा मौका नहीं मिला।
उन्होंने कहा, 'खिलाड़ियों को किसी बड़े टूर्नामेंट से पहले कम से कम चार से छह हफ्ते तक प्रैक्टिस करनी पड़ती है। नैशनल में खेलने को लेकर दबाव डालने से उन्हें सही प्रकार से प्रैक्टिस करने का मौका नहीं मिला। चोटी के खिलाड़ियों को नैशनल में खिलाने का आइडिया अच्छा है लेकिन इसका आयोजन ऑफ सीजन यानी जनवरी-फरवरी में करवाना चाहिए था।'