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डायबिटीज पर नियंत्रण के लिए करें ये योगासन

Thu, 20 Dec 2012 05:02 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 20 Dec 2012 05:02 PM IST
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yogasanas for diabetics

योगासन न सिर्फ स्वस्थ जीवनशैली के लिए जरूरी हैं बल्कि इनके नियमित अभ्यास से कई गंभीर बीमारियों को नियंत्रित करने में भी आसानी होती है। अब डायबिटीज को ही ले लें। इसे नियंत्रित रखने के लिए हम तरह-तरह की दवाएं लेते हैं, परहेज करते हैं और सावधानियां बरतते हैं लेकिन फिर भी कई बार इसे नियंत्रित करने में असफल होते हैं। ऐसे में कुछ ऐसे योगासन हैं जिनके नियमित अभ्यास से डायबिटीज को नियंत्रित रखने में आसानी होगी।

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पश्चिमोत्तानासन
इस आसन से शरीर का पाचनतंत्र मजबूत होता है, पेट ठीक रहता है और शरीर में रक्त का संचार तेजी से होता है जिससे व्यक्ति को डायबिटीज से लड़ने में आसानी होती है। इसे करने के लिए पैर सीधे फैलाकर बैठ जाएं। फिर दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और सांस भरते हुए पैरों के तलवे को पकड़ने की कोशश करें। घुटने से माथा सटना चाहिए। फिर सांस छोड़ते हुए हाथ ऊपर करके सामान्य हो जाएं। इस आसन को दो से तीन बार दोहराएं।
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सर्वांगासन
इसे करने से थॉयराइड और पैराथॉयराइड ग्रंथियों, जो मोटापे, प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट का मेटाबॉलिज्म करती हैं, को मजबूती मिलती हैं। इसे करने के पहले सीधे लेट जाएं, फिर पैरों को धीरे-धीरे उठाते हुए 90 डिग्री का कोण बनाएं। हाथों से कमर को सहारा दें। इस आसन में शरीर का सारा भार गर्दन पर पड़ना चाहिए। पैरों को सीधा रखें।
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भ्रामरी और भ्रस्रिका प्राणायाम

प्राणायाम डायबिटीज के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। खासतौर पर भ्रामरी और भ्रस्रिका प्राणायाम तो डायबिटिक लोगों को जरूर करने चाहिए। इनके नियमित अभ्यास से स्ट्रेस लेवल कम होता है और शरीर में ऑक्सीजन का मात्रा बढ़ती है। भ्रामरी करने के लिए पद्मासन में बैठ जाएं। अंगूठे से कान बंद करें और ऊपर की तीन उंगलियों को आंखों पर रखें। अब गहरी सांस लेते हुए गले से उच्चारण करें। भस्रिका प्राणायाम के लिए पद्मासन में बैठ जाएं। गहरी सांस लें और उसे जल्दी-जल्दी छोड़ें। इस प्रक्रिया में मुंह बंद रखें और सांस की सारी प्रक्रिया नाक से ही करें।        

भुजंगासन

भुजंगासन करने के लिए पहले पेट के बल लेट जाएं। दोनों हाथों को कंधों के पास रखें और धीरे-धीरे सिर और छाती को ऊपर उठाएं। सांस को सामान्य रखते हुए क्षमतानुसार रुकें।


सूर्य नमस्कार
अगर आपके पास सभी आसनों को करने का पूरा समय नहीं है तो रोज दो से तीन बार सूर्य नमस्कार जरूर करें। सिर्फ इस आसन को करने से भी आप काफी हद तक इस रोग को नियंत्रित कर सकेंगे। इससे श्वास, पेट और प्रतिरोधी क्षमता को लाभ पहुंचता है।

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