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फर्टिलिटी बढ़ाने में मददगार हैं ये आसन
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 22 Jan 2013 05:26 PM IST
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बदलती जीवनशैली के कई खामियाजों में से एक है फर्टिलिटी संबंधी समस्याएं। अगर आप अपने घर में नन्हीं किलकारी गूंजने के इंतजार में हैं और अब अपना परिवार बढ़ाने की सोच रहे हैं तो योग की मदद से भी आप अपनी फर्टिलिटी बढ़ा सकते हैं।
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ऐसे कई आसन हैं जिन्हें नियमित रूप से और सही तरीके से करने पर प्रोस्टेट ग्लैंड और ओवरी से संबंधित समस्याओं से निपटने में आसानी हो सकती है। सेहतमंद रुटीन और स्वस्थ डाइट के साथ अगर आप इन आसनों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने से आपको यकीनन फायदा मिलेगा।
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बद्ध कोणासन
बद्ध कोणासन वैसे तो पुरुषों और महिलाओं, दोनों के लिए बहुत लाभदायक है लेकिन महिलाओं के लिए यह इसलिए भी अधिक फायदेमंद है क्योंकि इसे करने से फर्टिलिटी बढ़ने के साथ-साथ उन्हें प्रसव पीड़ा भी कम होती है। इस आसन को महिलाएं पीरियड्स के दौरान न करें। रीढ़ की हड्डी या स्पौंडलाइटिस की समस्या वाले लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
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इसे करने के लिए पहले दौनों पैरों को सामने फैलाकर बैठ जाएं। अब दोनों पैरों के घुटनों को मोड़ते हुए तलवों को मिलाएं। तितली आसन जैसी मुद्रा में आ जाएं। अब दोनों हाथों से पैरों की उंगलियों को पकड़ लें। शरीर तना रहे और रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी होनी चाहिए। अब गहरी सांसे लेते हुए आगे की ओर झुकें और अपनी ठुड्डी को पैरों के अँगूठे से छूने का प्रयास करें और सांस छोड़ें। फिर सांस लेते हुए प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं।
तितली आसन
तितली आसन पुरुषों और महिलाओं के लिए लाभदायक है। इस आसन के दौरान आपकी अवस्था तितली जैसी हो जाती है इसलिए इसे तितली आसन कहते हैं। इस आसन के लिए पैरों को सामने की ओर सीधा रखें। दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ें और दोनों तलवों को आपस में मिला लें। हाथों से पैरों की उंगलियों को पकड़ें और एड़ी को शरीर के पास लाने का प्रयास करें।
जानू शीर्षासन
यह शीर्षासन का ही एक प्रकार है जिसे पुरुष और महिलाएं, दोनों कर सकते हैं। इसे करने से मांसपेशियों का तनाव दूर होता है और प्रोस्टेट ग्लैंड्स मजबूत होते हैं। घुटनों और कमर की तकलीफ जिन्हें हो वे इसे न ही करें तो बेहतर होगा।
इसे करने के लिए के लिए दोनों पैरों को सामने फैलाकर पैठ जाएं। अब बाएं पैर को घुटने से मोड़ें और उसके तलवे को दाईं जांघ से मिलाएं। सांस लेते हुए ओर झुकें और हाथों से दाएं पंजे के अंगूठे को छुएं। इसमें सिर को घुटने से छूने के बजाय अपने पेट से जांघों को छूने की कोशिश करें। फिर सामान्य अवस्था में आएं। इसी प्रक्रिया को दूसरे पैर से करें।