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एक से अधिक भगवान को क्यों पूजते हैं हम
ज्योतिर्मय
Updated Thu, 28 Mar 2013 12:15 PM IST
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पहले तक पूछा जाता होगा कि आप ईश्वर में विश्वास करते हैं या नहीं, लेकिन अब पूछा
जाता है कि आप एक भगवान या इष्ट को मानते हैं या ज्यादा को।
वैश्विक रिसर्च एजंसी ‘द इनोवेशंस एंड ब्रांड रिसर्च स्पेशलिस्ट्स (इप्सोस)’ द्वारा किए सर्वे के मुताबिक 62 प्रतिशत लोग एक मुख्य देवता या ईश्वर के अलावा दूसरी दैवी शक्तियों को भी मानते हैं।
दुनिया के 82 प्रतिशत लोग आस्तिक हैं। कम से कम एक ईश्वर को तो मानते हैं। एक से ज्यादा देवी देवता मानने वालों का प्रतिशत भी अच्छा है अर्थात दो या अधिक भगवान मानने वालो का बोलबाला है।
इप्सोस ने 23 देशों में यह सर्वे किया था। ईश्वर या एक सर्वोच्च शक्ति को मानने वालों की सबसे बड़ी संख्या इंडोनेशिया में है। वहां 93 फीसदी लोग मानते हैं कि ईश्वर एक है।
तुर्की, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और मैक्सिको में एक ही ईश्वर को मानने वालों की संख्या इसके बाद आती है एक ही मालिक की बंदगी करने वालों के मामले में भारत अपने पड़ोसी चीन और रूस से थोड़ा आगे है।
यह भी सामने आया कि एक या ज्यादा भगवानों को मानने वालों का यकीन यह भी है मृत्यु जीवन का अंत नहीं है, बल्कि वह एक पड़ाव भर है। जिंदगी मृत्यु को बाद भी चलती रहती है।
सर्वे के मुताबिक मैक्सिको के लोग तो लोकोत्तर जीवन में सबसे ज्यादा यकीन करते हैं। यहां के 40 फीसदी लोगों ने माना कि मृत्यु में बाद भी जीवन होता है। मरने के बाद फिर नया जन्म मिलता है। यह मानने वालों की संख्या भारत में सबसे ज्यादा है, 67 प्रतिशत।
दक्षिण कोरिया, स्पेन, फ्रांस ,जापान और बेल्जियम में भी 35 से 40 प्रतिशत लोग जीवन की निरंतरता में यकीन करते हैं। सर्वे में एक बात यह भी सामने आई कि जीवन की निरंतरता में विश्वास व्यक्ति को ऊर्जा देता है।
अभी नहीं तो फिर कभी बेहतर जिंदगी मिलेगी। इस आस्था के साथ किसी एक देवता या इष्ट के भरोसे रहने के बजाय लोगों को यहां वहां कई द्वार खटखटाना ज्यादा सुविधाजनक लगता है।
वैश्विक रिसर्च एजंसी ‘द इनोवेशंस एंड ब्रांड रिसर्च स्पेशलिस्ट्स (इप्सोस)’ द्वारा किए सर्वे के मुताबिक 62 प्रतिशत लोग एक मुख्य देवता या ईश्वर के अलावा दूसरी दैवी शक्तियों को भी मानते हैं।
दुनिया के 82 प्रतिशत लोग आस्तिक हैं। कम से कम एक ईश्वर को तो मानते हैं। एक से ज्यादा देवी देवता मानने वालों का प्रतिशत भी अच्छा है अर्थात दो या अधिक भगवान मानने वालो का बोलबाला है।
इप्सोस ने 23 देशों में यह सर्वे किया था। ईश्वर या एक सर्वोच्च शक्ति को मानने वालों की सबसे बड़ी संख्या इंडोनेशिया में है। वहां 93 फीसदी लोग मानते हैं कि ईश्वर एक है।
तुर्की, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और मैक्सिको में एक ही ईश्वर को मानने वालों की संख्या इसके बाद आती है एक ही मालिक की बंदगी करने वालों के मामले में भारत अपने पड़ोसी चीन और रूस से थोड़ा आगे है।
यह भी सामने आया कि एक या ज्यादा भगवानों को मानने वालों का यकीन यह भी है मृत्यु जीवन का अंत नहीं है, बल्कि वह एक पड़ाव भर है। जिंदगी मृत्यु को बाद भी चलती रहती है।
सर्वे के मुताबिक मैक्सिको के लोग तो लोकोत्तर जीवन में सबसे ज्यादा यकीन करते हैं। यहां के 40 फीसदी लोगों ने माना कि मृत्यु में बाद भी जीवन होता है। मरने के बाद फिर नया जन्म मिलता है। यह मानने वालों की संख्या भारत में सबसे ज्यादा है, 67 प्रतिशत।
दक्षिण कोरिया, स्पेन, फ्रांस ,जापान और बेल्जियम में भी 35 से 40 प्रतिशत लोग जीवन की निरंतरता में यकीन करते हैं। सर्वे में एक बात यह भी सामने आई कि जीवन की निरंतरता में विश्वास व्यक्ति को ऊर्जा देता है।
अभी नहीं तो फिर कभी बेहतर जिंदगी मिलेगी। इस आस्था के साथ किसी एक देवता या इष्ट के भरोसे रहने के बजाय लोगों को यहां वहां कई द्वार खटखटाना ज्यादा सुविधाजनक लगता है।