ऐसे वेद मंत्रों की शक्ति का लाभ प्राप्त कर सकते हैं

अमर उजाला/ दिल्ली Updated Fri, 25 Oct 2013 08:49 AM IST
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ved mantra power

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वेद न तो दूसरी पुस्तकों की तरह कोई ग्रंथ हैं और कोई धर्म संहिता जिनकी किसी एक ने या कुछ लोगों ने मिलकर रचना की हो। वे बाहरी और आंतरिक- दोनों तरह के खोजों की एक श्रृंखला हैं। श्रीअरविंद का यह सिद्धांत अब विज्ञान के तल पर भी स्वीकार किया जाने लगा है। अमेरिकन इंस्टीट्यूट आफ वैदिक साइंस के संस्थापक ऍर निगेशक डा. डेविड फ्राले के अनुसार वेद मंत्रों का संबंध एक आकार को ध्वनि में बदलने से है।
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उनके अनुसार हर ध्वनि एक आकृति से जुड़ी होती है। आकृति और ध्वनि के बीच के इस संबंध को ही मंत्र के नाम से जानते हैं। उस ध्वनि का मर्म समझकर किसी आकृति या व्यक्ति को भी प्रभावित किया जा सकता है। वेदमंत्रों का प्रभाव जानने और उनकी शक्ति का उपयोग करने के लिए जरूरी है कि मंत्रों का सही उच्चारण किया जाए।
उस उच्चारण को समझाने सिखाने के लिए मंत्रों को रटने और उनके उतार चढ़ाव को जानने के लिए खास तरह की शिक्षा चाहिए। वेदों के अर्थ और उपयोग को जानने वाले विद्वान इसके लिए गुरुकुल शिक्षा पद्धति पर जोर देते थे। जीवनोपयोगी दूसरे विषयों की औपचारिक शिक्षा के बाद वेदमंत्रों के सही सही उच्चारण पर ही जोर दिया जाता था।
एक खास उम्र के बाद जब शरीर के अंग कमजोर होने लगते हैं,खासतौपर दांत गिर जाते हैं या कमजोर होने लगते हैं अथवा स्वरतंत्र गड़बड़ाने लगते हैं तो वेदों का अभ्यास रोक दिया जाता है। वे साधक अधिकारी विद्वान तो हो सकते हैं पर वेदमंत्रों में निहित शक्ति का लाभ नहीं उठा सकते।

वेदमंत्रों का यह प्रयोग सोच को बेहतर बनाने और व्यक्ति का उसका स्तर उठाने के लिए किया सा सकता है। इनके अध्ययन अभ्यास से जानकारी बढ़ाने की बात तो सतही और ज्ञान विज्ञान की दूसरी विधाओं से ज्यादा उपयोगी नहीं हैं।
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