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इस तरह पूजा एवं ध्यान करने से मिलता है मात्र 25 प्रतिशत लाभ

Tue, 10 Sep 2013 02:43 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Tue, 10 Sep 2013 02:43 PM IST
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two time meditation and puja in a day

आमधारणा यह है कि कम से कम सुबह के समय, दिन में एक बार तो ध्यान, योग और प्रार्थना आदि करना ही चाहिए। बेहतर तो यही है कि दोनों समय ध्यान उपासना का अभ्यास किया जाए। दोनों समय नहीं हो सके तो एक वक्त तो उपासना करना ही चाहिए।

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लेकिन बंगलुरू के अध्यात्म विद्या शोध संस्थान (फाउंडेशन फार रिसर्च आफ स्पिरिचुअल साइंस) के शोधकर्ताओं का मानना है कि उपासना प्रार्थना दोनों समय की जाए तो ही पूरा लाभ होता है। एक समय, सुबह या शाम के वक्त की गई प्रार्थना उपासना से अधिकतम पचीस प्रतिशत लाभ होता है।
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वैदिक साहित्य और 350 साधकों का अध्ययन कर शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे कि सुबह के समय की गई साधना दिन भर के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है। शाम के वक्त उपासना प्रार्थना नहीं की जाए तो आंतरिक स्तर पर बीस से पचीस प्रतिशत तक ही पोषण मिलता है।
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वह पोषण दिन में तीन बार किए जाने वाले आहार की जगह एक बार भोजन जैसा होगा। गायत्री तत्व क्या है और क्यों इस मंत्र की इतनी महिमा है, इस प्रश्न का समाधान आवश्यक है। आहार में व्यक्ति अन्न, जल, वायु, अग्नि आदि पदार्थों से शरीर को पोषण मिलता है जबकि प्रार्थना उपासना से आंतरिक या आत्मिक स्थिति का पोषण होता है।

वैदिक वांग्मय के आधार पर संस्थान के डा. देव बरुआ ने इस तथ्य को संध्या उपासना से समझाया है। उनके संध्या वंदन के समय किए जाने वाले आध्यात्मिक उपचार देवतत्व और भूततत्त्व, मन और प्राण, ज्ञान और कर्म दोनों को परिमार्जित करते है।


संध्या में प्रयुक्त गायत्री मंत्र के देवता सविता हैं, सविता सूर्य की संज्ञा है, सूर्य के नाना रूप हैं, उनमें सविता वह रूप है जो समस्त देवों- शरीर और जीवन की गतिविधियों को प्रेरित करता है। दोनों समय की उपासना में जागृत अवस्था में, दिन के समय और रात्रि को विश्राम के समय सविता देवता से पुष्टि तुष्टि की प्रार्थना की जाती है।

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