फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Yog-Dhyan ›   tips for succes and growth decision

अगर आप भी रात में करते हैं यह काम तो अपना ही नुकसान कर रहे हैं

Tue, 12 Aug 2014 08:36 AM IST
Updated Tue, 12 Aug 2014 08:36 AM IST
विज्ञापन
tips for succes and growth decision

कुछ काम ऐसे हैं जो दिन में करने योग्य हैं। अनजाने में ही हम इन कामों को रात में भी करने लगे हैं। जबकि रात में इन कामों को करने से खुद का ही नुकसान होता है। इसलिए इन कामों को शाम ढ़लने से पहले ही कर लेना चाहिए।

विज्ञापन

सुबह के समय यह काम करना सबसे फायदेमंद

tips for succes and growth decision

आजकल बहुत से व्यक्ति महत्वपूर्ण फैसले रात में लेते हैं जबकि शोध से पता चला है कि दिन में और खासकर सुबह के वक्त किए गए निर्णय ज्यादा सही और कामयाब होते हैं, जबकि दोपहर बाद लिए जाने वाले फैसले कम सही या गलत हो सकता है।

मनस्विद डा. एन फ्रेंकलिन का कहना है कि बेहद जरूरी नहीं हो तब रात के वक्त फैसले किए ही नहीं जाने चाहिए। डा. फ्रेकलिन ने अपने इस निष्कर्ष की पुष्टि में खुद अपने ही सत्तर फैसलों का हवाला दिया और कहा कि दोपहर के बाद किए गए फैसले तो असस्सी प्रतिशत तक गलत साबित होते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

क्यों दिन के समय लिया गया निर्णय सफल होता है

tips for succes and growth decision

मनस्विदों के अनुसार इसकी वजह थकान, हड़बडी़, काम का दबाव है। लेकिन योग के अनुसार सुबह के बाद दिन में क्रम से बढ़ते रहने वाला रजस और तमस है।

पातंजल योग के प्रसिद्ध साधक संत स्वामी ओमानंद तीर्थ के अनुसार दिन की तरह मन के भी अपने अंधेरे और उजाले क्षण होते हैं। जब दिन का क्षण आता है, सुबह से तीन घंटे पहले तक तो हर चीज बहुत अच्छी लगती है। पर रात के वक्त चित्त की ऊर्जा क्षीण होने लगती है और उस वक्त लिए जाने वाले फैसले गड़बड़ाने वाले होते हैं। उदाहरण देते हुए स्वामीजी ने कहा है कि रात में क्षीण ऊर्जा के समय कोई निर्णय ले लिया जाए तो वह समझ का निर्णय नहीं होगा।

एक मामूली उदाहरण से भी समझा जा सकता है कि प्रकाश हो तो किसी को भी देख सकते हैं। अचानक बिजली चली जाए तो किसी को नहीं देख सकते; लगेगा कि जो लोग अभी दिखाई ते रहे थे वे और दूसरी तमाम चीजें नहीं दिखाई देंगी। इस स्थिति में क्या कहेंगे कि उन सब चीजों का और व्यक्तियों का अस्तित्व मिट गया है। ऐसा कहना बहुत जल्दबाजी का होगा।


विज्ञापन

उन चालीस कामों में पांच सात ही नाकाम रहे

tips for succes and growth decision

स्वामी ओमानंद की बात को अपनी तरह से पुष्ट करते हुए फ्रेंकलिन ने कहा है कि जिन सत्तर फैसलों की समीक्षा की गई उनमें चालीस सुबह के वक्त तय किए थे। उन चालीस कामों में पांच सात ही नाकाम रहे। बाकी सभी के नतीते अच्छे ही रहे। सुबह का समय और शाम को दिन ढलने से पहले या दिन और रात के मिलन काल को ध्यान उपासना के लिए सर्वश्रेष्ट कहा गया है।

उसकी वजह भी यही है कि सूर्य के रहते तक आंतरिक ऊर्जा अधिक उर्वर स्थिति में रहती है। रात के अंधेरे में नाम स्मरण और स्वाध्याय जैसे उपाय का ही परामर्श दिया गया है। इस वक्त में किसी भी कठोर साधना के लिए मनाही है।

चिकित्सा विज्ञान का हवाला देते हुए डा. फ्रेंकलिन का कहना है कि औषध उपचार भी अक्सर दिन के समय ही किए जाते हैं। आकस्मिक या आपात चिकित्सा को छोड़ दें तो सभी दवाएं और इलाज दिन के समय ही किए जाते हैं। वजह सिर्फ यही है कि दिन के समय मनुष्य का मन, शरीर और स्वास्थ्य ज्यादा ग्रहणशील होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed