तो आप भी भूत प्रेतों में यकीन करने लगेंगे
बहुतेरे लोग अपने जीवनकाल में ऐसी कई असामान्य बातों का अनुभव करते हैं जिन्हें प्रमाणित नहीं किया जा सकता। अक्सर वे सच भी नहीं लगती।
प्रतीत होता है कि वे किसी शून्य से प्रकट होती है। ऐसे अनुभवों में किसी घटना का पहले से ही आभास हो जाना, सपने में देखी बातों का सच निकलना और भूत प्रेत आदि का दिखाई देना भी शामिल है।
स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय के जेबी रिन ने अपनी पुस्तक 'यू फंटियर्स ऑफ द माइंड' में साबित किया है कि जिन बातों को हम समझ नहीं उन्हें नकारना कोरी बकवास है।
इस विज्ञान का संबंध गुप्त शक्तियों या घटनाओं जैसे कि दूरानुभूति, भूत-प्रेत आदि, जिन्हें अब तक समझा नहीं जा सका है, के अध्ययन से है।
मरने के बाद जीवन की मान्यता
ड्यूक में अतीन्द्रिय बोध पर प्रयोगशाला में मानक वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को ध्यान में रख कर प्रयोग किये गए, जिनके परिणामों को समस्त विश्व में मान्यता दी गई। इन परिणामों को लेकर 1937 में मनोविज्ञानियों ने अनेक असाधारण घटनाओं का अध्ययन किया और उनकी व्याख्याएं की हैं।
गोटेबोर्ग में हुई स्पिरिचुअल कांफ्रेंस में इस बात की पुष्टि हुई। उसमें क्रिश्चियन्स साइंस रिव्यू के ए. डी. स्टीवर्ट ने कहा कि ईसाई धर्म में मरने के बाद जीवन की मान्यता नहीं है।
न ही मरने के बाद जीवन को नकारा गया है। फिर भी परामनोविज्ञान के दायरे में जितने मामले आए हैं उनमें सबसे ज्यादा ईसाई जगत से ही हैं।
अतींद्रिय शक्ति या तो अपने आप जागृत होती है अथवा प्रार्थना से जगाई जा सकती है। प्रार्थना के अलावा योग माध्यम से भी यह शक्ति जागृत हो सकती है।
यह बल खुद प्रार्थना और प्रभुकृपा के बल पर विकसित किया जा सकता है। कुछ लोगों को इसकी झलक अनायास बिना कुछ किए मिल जाती है। लेकिन वे इसका लाभ अपने आप नहीं उठा सकते।