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एक ही शरीर में स्त्री और पुरूष दोनों रहते हैं
ज्योतिर्मय
Updated Wed, 24 Apr 2013 11:44 AM IST
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ब्राजील के प्रमुख शहर सोपौलो की इडा लारेन्स बारह बच्चों की माँ बन चुकी थी। अब तेरहवें बच्चे के जन्म की संभावना नहीं के बराबर थी। तभी उन्हें सेयांस में दिवंगत हुई पुत्री इमीलिया का सन्देश मिला कि मैं फिर जन्म लेना चाहती हूँ। तुम्हारे ही गर्भ से किन्तु इस बार पुत्र रूप में। इमीलिया को जीते जी भी अपने लड़की होने पर घोर असन्तोष था।
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उसने विवाह से भी इन्कार कर दिया था और लड़की होने की ग्लानि से २० वर्ष की आयु में विष खाकर मर गई थी। इस संदेश के कुछ दिनों बाद इडा लारेन्स फिर गर्भवती हुई। यथासमय इसने पुत्र को जन्म दिया। उसका नाम पोलो रखा गया। हैरानी की बात कि पोलो की कई प्रवृत्तियाँ अब भी इमीलिया जैसी थीं।
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श्रीलंका की एक दो वर्षीया लड़की सिरिमाओ ने बोलना शुरू करते ही बताया कि पूर्वजन्म में वह लड़का था। परामनोवैज्ञानिकों ने उसके बारे में सुना तो सम्पर्क किया और खोजें कीं। उसके बताये हुए पूर्व जन्म सम्बन्धी विवरण प्रामाणिक पाये गए। उसने अपने पूर्वजन्म में तिलकरत्ने नामक लड़का होने की बात बताई थी।
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जीव विज्ञान के अनुसार शरीर में उभयलिंन्गीय चेतना रहती है। नारी के भीतर एक नर सत्ता भी होती हैं, जिसे ऐनिमस कहते हैं। इसी प्रकार हर नर के भीतर नारी की सूक्ष्म सत्ता विद्यमान होती है, जिसे ऐनिमा कहते हैं। इस तह के ढेरों प्रमाण और उदहरण देकर म्यांमार के डा. इएस सुव्रतो ने साबित करने की कोशीश की है कि आत्म चेतना ना तो पुरुष है और ना ही नारी। अपनी पुस्तक डिटरमिनेशन द जेंडर- में लिखाः है कि आत्मा न नर है न नारी वह एक दिव्य सत्ता भर है, समयानुसार, आवश्यकतानुसार वह तरह-तरह के रंग बिरंगे परिधान पहनती बदलती रहती है।
उनका कहना है कि मनुष्य ही क्यों हर जीवधारी में नर और नारी की उभयपक्षीय सत्ता बीज रूप में विद्यमान रहती है। जो पहलू उभर आता है वही सक्रिय रहता है दूसरा पक्ष सोया रहता है। इस संसार में जीवन का ऐसा रूप भी है जिसमें नर और नारी के दोनों पक्ष समान रूप से सक्रिय होते हैं। वे एक ही जीवन में कभी नर और मादा बनते रहते हैं। बहरहाल स्त्री या पुरुष होने पर इतराने की जरूरत नहीं है। यह माया अगम अगोचर और अपार है।