खबर अच्छी है, जानें कैसे आसानी से जी सकते हैं आप सौ दो सौ साल
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कोलम्बिया विश्वविद्यालय के जीव-विज्ञानी डॉ0 एच॰ सिक्स ने 1978 के आसपास कहा था कि शरीर को यदि रासायनिक दोषों और व्याधियों से मुक्त रखा जा सके तो आठ सौ साल तक आसानी से जिया जा सकता है।
जिस वक्त डा. सिक्स ने यह कहा था, उस समय भारतीयों की औसत उम्र 40 वर्ष के आसपास थी। अब डेढ़ गुना से ज्यादा अर्थात 65 वर्ष के करीब हो चुकी है।
बंगलुरू के जीव विज्ञानी प्रो. जेए रामतीर्थम के अनुसार शरीर के भीतरी अवयवों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और उन्हें स्वाभाविक सरल रीति से काम करने दिया जाए तो जीवन 100 वर्ष तक आराम से चल सकता है।
शरीर के भीतर जो टूटफूट होती रहती है, वह अपने आप रिपेयर होती रह सकती है। मानव शरीर का सामान्य तापमान 98.6 डिग्री फारेनहाइट होता है। प्रो. रामतीर्थम के अनुसार इसे कम करते हुए आधा अर्थात् 49 डिग्री किया जा सके तो लगभग दो हजार वर्ष जिया जा सकता है।
तुरंत पचीस प्रतिशत तक बढ़ सकती है उम्र
खोज यह है कि शरीर के जीव कोषों की क्षतिपूर्ति 98 तापमान रहने पर जिस क्रम से होती है-तापमान आधा होने पर उससे बीस गुनी अधिक क्षति-पूर्ति हो सकती है। अमेरिका के राकले फर इन्स्टीट्यूट के जीव-विज्ञान विभाग में लंबे समय से जीवाणुओं की जीवनचर्या पर निगाह रखी गई।
'अमीबा और पैराथीशियम जीवाणुओं को आहार तो पहुंचाया जाता रहा पर उतना ही जितने से काम चल सके। देखा गया कि एक कोषीय जीव ने 900 पीढ़ियां तक देख ली। इससे पहले ये जीव साठ सत्तर पीढ़ी ही देख पाते थे।
इन एक कोषीय जीवों पर किए गए प्रयोगों को मनुष्यों तक बढ़ाया गया है, और पाया है कि उचित या जरूरत भर का आहार और कम तापमान में जन्म दे चुका पर उसका जीवन अक्षुण्य बना रहा।
यदि आवश्यक सुविधाएं मिल सकें तो मनुष्य की आयु अब की तुलना में तुरंत पचीस प्रतिशत तक बढ़ सकती है। कुछ और गहन प्रयोग किए जाएं तो पांच सात गुना अर्थात चार पांच सौ वर्ष तक तो बढ़ाई जा सकती है।