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फिर डाक्टर की बजाय ज्योतिषी करेंगे रोग का ईलाज

Sat, 25 May 2013 02:55 PM IST
ज्योतिर्मय
ज्योतिर्मय Updated Sat, 25 May 2013 02:55 PM IST
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Instead of doctor may astrologer treat disease

शादी से पहले तो सब ठीक था पर शादी के बाद से पुरंदर पुर (महाराष्ट्र) की यशोदा ताई को खुजली ने इस तरह घेरा कि तमाम इलाज कराने के बावजूद रोग ने पीछा नहीं छोड़ा। संयोग की बात की शिरड़ी से सांई मिशन के योगी बाबा धूनी राम पुरंदरपुर आए तो यशोदा ताई उनके पास भी गई। योगी बाबा ने थोड़ा जांचा परखा और ध्यान में जा कर बताया कि ताई ने पिछले जन्म में एक संन्यासी पर जलते हुए अंगारे फेंके थे।

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जब तक वह जलने, चोट खाने या रक्तदोष के कारण ही सही खुजली और चर्मरोगों से परेशान लोगों की सेवा नहीं करती, तब तक ठीक नहीं होगी। ताई ने आठ महीने तक इस तरह के लोगों की सेवा की और ठीक हो गई। सांई संगठन के सदस्यों का मानना है कि अस्सी प्रतिशत रोग पिछले जन्म के पापों से प्राप्त होते हैं। रिग्रेशन थैरेपी का तो आधारभूत सिद्धांत ही यह है कि तमाम रोग पिछले जन्म में या इस जन्म में भी दूसरों को सताने के कारण होते हैं।
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इस चिकित्सा पद्धति के समर्थक और कन्याकुमारी केंद्र के अनंतनाथ का कहना है कि प्रायश्चित किया जाए तो नब्बे प्रतिशत रोग जिनमें जटिल रोगों की संख्या पचहत्तर प्रतिशत तक है, ठीक हो सकते हैं। अस्थमा, कुछ खास हृदयरोग, ब्लडप्रेशर, वंध्यत्व या संतान के जन्म लेते ही मर जाने की समस्याएं तो निदान के बाद ही सुधरने लगती है। इस दिशा में खोज जारी है।
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आयुर्वेद का तो कहना ही है कि पिछले जन्म में किए गए पाप ही इस जन्म या जीवन में रोग के रूप में पीड़ा देते है। कोई रोग हो तो इस कोण से निदान ढूंढा जा सकता है पर नहीं हो तो भी सावधानी रखना चाहिए कि किसी को कष्ट न पहुंचे, दूसरों का अहित न हो और मन में द्वेष की भावना तो नहीं ही हो। अगर हो तो उसे स्वाध्याय और साधुजनों की संगति से ठीक किया जा सकता है।
 
ज्योतिष के जानकार तो जन्म, बचपन और उसके बाद अनायास मिल जाने वाली स्थितियों को भी पिछले जन्म का परिणाम मानते हैं। उनके अनुसार पिछले जन्म के जिन कर्मों का भाग शेष रह गया है उनमें शुभ कर्म अधिक है तो संस्कारी माता पिता और समृद्ध घर में जन्म होता है। विकास की अच्छी स्थितियां मिलती हैं।


यदि अशुभ कर्मो की अधिकता है तो जन्म विषम परिस्थितियों में होता है जहां पर सुख-सुविधाओं का अभाव होता है या संगती अच्छी नहीं मिलती हैं, जिसके कारण जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ हो जाता है। बहरहाल इस दिशा में अनुसंधान की जरूरत है। इक्का दुक्का जगह शुरु भी हुआ है पर स्वास्थ्य विषयों पर तो दुनिया भर में खोज चल रही है।

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