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बिना दवाई के डिप्रेशन से छुटकारा संभव

Mon, 08 Apr 2013 12:38 PM IST
ज्योतिर्मय
ज्योतिर्मय Updated Mon, 08 Apr 2013 12:38 PM IST
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get relief from depression without medicine

डिप्रेशन या मनो अवसाद आधुनिक समाज

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में एक बहुप्रचलित मानसिक रोग की श्रेणी में आता है। इसे सभ्यता का रोग भी कहते हैं। समय के साथ बढ़ते घरेलू विवाद, अत्यधिक व्यस्तता, आगे निकलने की होड़, मनमुताबिक काम न होना, अधिकारी द्वारा तिरस्कृत किया जाना या अपनी क्षमता पर संदेह जैसे कई कारण हैं जो अवसाद में ले जाते हैं।

योगशास्त्र का मानना है कि इस तरह की कोई भी मनोबाधा अपने आप में विश्वास की कमी के कारण जन्म लेती है। चिकित्सा शास्त्र डिप्रेशन का कारण मस्तिष्क में सिरोटोनीन, नार-एड्रीनलीन तथा डोपामिन आदि न्यूरो ट्रांसमीटर की कमी मानता है। इसे दूर करने के लिए दवाएं भी इसी स्तर की दी जाती हैं। 

योगशास्त्र ने इस तरह की समस्याओं के लिए ध्यान और प्रार्थना पर जोर दिया है। नई दिल्ली स्थित ऋषि चैतन्य फाउंडेशन के स्वामी अनूप योगी के अनुसार नियमित ध्यान और स्वाध्याय अवसाद से मुक्ति दिलाने के आसान उपाय हैं। संस्थान में किए प्रयोगों के अनुसार एक महीने तक किया गया अभ्यास एक वर्ष तक किए गए औषध उपचार की तुलना में ज्यादा उपयोगी है।

जहां तक आयुर्वेदिक दृष्टिकोण की बात है, डिप्रेशन मुख्य रूप से वात दोष की अधिकता से होने वाला रोग है। इसके लिए शास्त्र में विभिन्न चिकित्सा विकल्प उपलब्ध हैं, जो प्रभावी होने के साथ निरापद हैं। औषधियों के अंतर्गत ऐंद्री, शंखपुष्पी, वचा, जटामासी, सर्पगंधा, तगर, अश्वगंधा, अभ्रक भस्म, सारस्वतारिष्ट, ब्राह्मी घृत, सारस्वत चूर्ण, बृहतवान चिंतामणि रस आदि प्रमुख हैं।

इसके अलावा शिरोधारा व नस्य का भी विधान है जिसके अंतर्गत औषधि क्वाथ को सिर पर तथा नासा में क्रमश: डाला जाता है। साथ ही साथ मरीज से निम्न बातों का भी पालन कराएं। खाली रहने की स्थिति में फालतू नहीं बैठें, अपितु उस समय में अपनी रुचि का कोई कार्य या किसी पत्रिका, पुस्तक आदि का वाचन करें अथवा अपने मित्रों के साथ किसी बौद्धिक विषय पर वार्तालाप करें।

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