{"_id":"41e6e72df568b347a0f507c94f31c9be","slug":"boost-memory-power-in-two-months","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिर्फ दो महीने में बौद्घिक क्षमता बढ़ाना चाहेंगे?","category":{"title":"Yog-Dhyan","title_hn":"योग-ध्यान","slug":"yoga"}}
सिर्फ दो महीने में बौद्घिक क्षमता बढ़ाना चाहेंगे?
अमर उजाला/ दिल्ली
Updated Mon, 28 Oct 2013 10:47 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिर्फ आठ सप्ताह यानी करीब दो महीने तक प्रतिदिन सत्ताइस मिनट सचेतन ध्यान किया जाए तो मस्तिष्क के विभिन्न भागों में ऐसे बदलाव लाए जा सकते हैं जिन्हें मापा जा सकता है। ये बदलाव आपकी तनाव झेलने की क्षमता बढ़ा सकते हैं, सोचने समझने और निर्णय लेने की शक्ति को सटीक बना सकते हैं और दिमाग को बिना थके आठ घंटे तक सक्रिय रख सकते हैं।
विज्ञापन
मैसाचुसैट्स जनरल हास्पिटल (एमजीएच) के शोधकर्ताओं का दावा तो यह भी है कि ध्यान के जरिए दिमाग के ग्रेमैटर में वक्त के साथ बदलाव होते हैं। अध्ययन रिपोर्ट एमजीएच की शोध पत्रिका न्यूरोइमेजिंग में छपी है। रिसर्च प्रोग्राम की वरिष्ठ अध्ययन लेखक सारा लाजार के मुताबिक ध्यान का अभ्यास यद्यपि मन की शांति और विश्राम से जुड़ा है लेकिन इस का अभ्यास मस्तिष्क की संरचना में भी बदलाव ला देता है।
विज्ञापन
पढें, साप्ताहिक राशिफल 28 से 4 नवम्बर तक
विज्ञापन
सोलह लोगों को इस अध्ययन में शामिल किया गया था। उन्हें आठ सप्ताह के तनाव घटाने वाले कार्यक्रम में शामिल किया गया। यूनिवर्सिटी आफ मैसाचुसैट्स सेंटर फार माइंडफुलनैस में आयोजित इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने से दो सप्ताह पहले और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद इन लोगों के मस्तिष्क की एमआरआई छवियां ली गईं।
इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले को ध्यान के अभ्यास में मार्ग दर्शन देने के लिए आडियो रिकार्डिंग दी गईं और उनसे कहा गया कि वे ध्यान रखे कि रोज कितना अभ्यास करते हैं। इसी समय ऐसे लोगों के समूह की भी एमआरआई छवियां ली गईं जो ध्यान नहीं करते थे।
दीपावली पर राशि से खरीदें बटुआ जेब रहेगी रही भरी
इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले लोगों ने तनाव में कमी की बात भी बताई। मस्तिष्क में ऐमिग्डाला नामक जो स्थान चिंता व तनाव में अहम भूमिका निभाता है वहां ग्रे-मैटर में कमी पाई गई। हालांकि जागरुकता से संबंधित संरचना इंसुला में कोई बदलाव नहीं देखा गया।
इस क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए लंबे समय तक ध्यान का अभ्यास जरूरी है। नियंत्रित ध्यान समूह में ये परिवर्तन नहीं देखे गए इससे जाहिर होता है कि ये बदलाव मात्र वक्त बीत जाने से नहीं हुए हैं। ध्यान के अभ्यास औसतन 27 मिनट प्रतिदिन किया गया।
अभ्यास में ध्यान के कोई जटिल प्रयोग नहीं किए गए। कुछ सावधानियों और मानसिक प्रयोगों के साथ केवल सांस के आने जाने पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए थे। कुछ और अभ्यास भी सिखाए गए। उल्लेखनीय है कि जिन लोगों को समूह में शामिल किया गया उन्होंने पहले कभी ध्यान प्रयोग नहीं किए थे।